Friday, November 6, 2009

शुक्रिया कहना सीखिए....!

आपके पास रोशनी है, जल है, भोजन है, तो हर किरण, हर बूँद और हर कण के प्रति शुक्रिया कहना सीखिए.
एक साधारण सा धन्यवाद आपके जीवन को बदल सकता है. जो कृतज्ञता महसूस करते हैं उनमें अपनेपन की सम्भावनाएं अधिक होती हैं.
हर बार जब हम धन्यवाद देते हैं तो पृथ्वी पर स्वर्ग का एहसास करते हैं. शुक्रिया दरअसल एक ऐसी सम्वेदना है, जो न केवल बेहतर जीवन के रास्ते
खोलती है, बल्कि हमें कमियों में भी सुकून महसूस कराती है. शोधों में पाया गया है कि जो लोग आभार व्यक्त करना जानते हैं उन्हें ज़िन्दगी जीने कि कला
आती है. वे सिर्फ खुशियों में नहीं दुःख में भी यकीन करते हैं, लेकिन उन्हें भरोसा होता है कि वे अपनों को बदौलत उस मुश्किल वक्त को भी पार कर लेंगे.

छोटे - छोटे   धन्यवाद
के  शब्द      बड़े - बड़े
कम   कर      जाते हैं.
वह  भी  तब,   जबकि
आपने    उसे    किसी
शब्द  को भी वास्तु की
प्राप्ति  के  एवज  में  ही
दिया   होता   है.

उन्होंने 'ईश्वर' को देखा है, जिन्होंने 'शुक्रिया' को देखा.

ग्रेटीट्यूड ए वे ऑफ़ लाइफ की लेखिका लूईस एल हे के अनुसार, अक्सर हमें जीवन में जो नहीं मिलता उसके प्रति हम शिकायत से भरे रहते हैं, लेकिन हमें जो  मिला है उसके प्रति अपना आभार या कृतज्ञता प्रकट नहीं करते, जबकि सही तरीका यह है कि जो कुछ आपके पास है, आपको हर उस चीज के लिए आभारी होना चाहिए. मान लीजिये आपको हमेशा अपने रंग के सांवले होने का अफ़सोस  होता है तो उस व्यक्ति की ओर देखिये जिसका रंग एकदम काला है. या फिर जब कभी कोई शारीरिक कमी आपको सालती हो तो उन निःसक्त जनों की ओर देखिये जो किसी अंग के आभाव में भी जीवन को ख़ुशी से जिए जा रहे हैं. कभी बच्चे के परीक्षा में अंक कम आ जाएं तो उसे कोसने की बजाय उन बच्चों के बारे में सोचिये जिन्हें शिक्षा मिली ही नहीं. अगर आपके घर में कार नहीं है तो ऐसा नहीं  है कि आपका जीवन बेमानी है, बल्कि ज़िन्दगी तो उसकी भी है जो साइकिल से अपना काम चलाता है. नौकरी में अगर वेतन कम है तो उन लोगों के बारे में सोचिये जिनके पास नौकरी ही नहीं है, वे पण गुजारा कैसे करते होंगे. हर पल को कोसने ओर कमियों को गिनने के बजाय हमें जीवन का मूल्यांकन करते रहना चाहिए और हमेशा उन खूबियों को ध्यान में रखना चाहिए जिनसे ईश्वर ने हमें नवाजा है.
लेखक अमांडा ब्रेडले के अनुसार, आपको अपने दोस्तों से मिली खुशी का आनंद उठाना चाहिए, हर दिन को जश्न के रूप में मनाना चाहिए और जीवन को उत्सव बना देना चाहिए. जब आप दिल से आभार मानते हैं तो इस खुशी का स्तर बढ़ जाता है. कृतज्ञता यही काम करती  है. यह हमें छोटे-छोटे पलों में खुश रहना सिखाती है. साथ ही यह रिश्तों को भी मजबूत बनाती है. जब आप विनम्रतापूर्वक किसी को शुक्रिया कहते हैं तो सामने वाले पर इसका अच्छा प्रभाव पड़ता है और संबंधों में घनिष्ठता आती है. इसके अलावा यदि आप किसी कि मदद करते हैं या आभार प्रकट करते हैं तो बदले में आपको भी वही मिलता है. यानी कि जब हम किसी के प्रति कृतज्ञता, आभार या सहयोग का रवैया अपनाते हैं तो वे सभी चीजें लौटकर हमारे पास आती हैं.
कुल मिलाकर शुक्रिया एक ऐसी संपत्ति है, जो बांटने से बढती है और आपको सम्पूर्ण जीवन का एहसास करवाती है. सोन्ज़ा के अनुसार, यदि आप साल में सिर्फ एक दिन शुक्रिया अदा करते हैं तो इसका कोई अर्थ नहीं है, लेकिन यदि आप इसे अपने जीवन में शामिल कर चुके हैं तो यह हर तरह से आपके लिए बेहतर है. दरअसल हर दिन आभार व्यक्त करने का अभ्यास आपके जीवन को बदल सकता है. प्रतिदिन अपनी कृतज्ञता डायरी में अपने माता-पिता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त कीजिए जिन्होंने यह खूबसूरत जीवन आपको उपहार के रूप में दिया है. अपने परिवार के अन्य सदस्यों और मित्रों को धन्यवाद दीजिए जिनका सहयोग आपको जरूरत के समय मिलता रहता है. अपने शिक्षकों और उन लोगों को शुक्रिया कहिए जिनसे आपने बहुत कुछ सीखा है. अपने देश, संस्कृति, प्रकृति और पर्यावरण के आभारी बनिए. जीवन में हर आनंद और अच्छे स्वास्थ्य के लिए कृतज्ञता प्रकट कीजिए. आप चाहें तो प्रतिदिन पांच चीजों के प्रति भी अपनी कृतज्ञता को डायरी के द्वारा व्यक्त कर सकते हैं. हर सप्ताह के अंत में उसे पढ़ें और पढ़कर अपनी मनःस्थिति की तुलना करें. इस बात पर गौर करें कि आपने  अपनी डायरी में किन-किन जरूरी और गैरजरूरी चीजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की है और किसको कितनी प्राथमिकता दी है और क्यों? सबको पढ़ें, सोचें और जांचें. आभार की ये  संवेदनाएं आपको दिल से महसूस होंगीं और बेहतरी के रास्ते खुलेंगे.

कहिए बार-बार

मनोविज्ञान के प्रोफेसर क्रिस पीटरसन के अनुसार, यदि आप कृतज्ञता का इस्तेमाल रोजाना अपने जीवन में करें तो यह आपके स्वास्थ्य को बेहतर  बनाने के साथ ही आपकी खुशी को भी दोगुनी कर देगी. आप शारीरिक और मानसिक रूप से अपने अन्दर बदलाव महसूस करेंगे.  आपके  भीतर शक्ति का संचार होगा, दृढनिश्चयी बनेंगे, जागरूकता बढेगी, प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत बनेगी और आशावाद का स्तर बढ़ जाएगा. एक अध्ययन के दौरान यह भी पाया गया है कि ऐसे लोग जो अपने जीवनकाल में शुक्रिया शब्द का अधिक से अधिक इस्तेमाल करते हैं वे जीवन में आने वाली कठिनाइयों के साथ बेहतर ढंग से तालमेल बिठा लेते हैं और कम दबाव में होते हैं. दिल से कहा हुआ शुक्रिया बेहद काम का होता है. यदि आप किसी बुरे समय से गुजर रहे हैं तो शुक्रिया कहना आपके दिमाग को ऊर्जा देगा, सोचने कि शक्ति को बढ़ाएगा और आपके लक्ष्य पर ध्यान केन्द्रित करने कि क्षमता प्रदान करेगा. अगर आप हर दिन शुक्रिया के साथ शुरू करते हैं तो आपका सामजिक दायरा बढ़ता है. आइन्स्टीन ने कहा है, धन्यवाद प्रतिदिन १०० बार. यह एक ऐसा कम है जिसे खुश स्वस्थ रहने के लिए कम समय में रोजाना किया जा सकता है और बदले में आपको इसकी कोई कीमत भी नहीं चुकानी पड़ती है, इसलिए हर दिन शुक्रगुजार बनें.(साभार- अहा! ज़िन्दगी, नवम्बर 2009)

प्रभाष जी का जाना...
यह बहुत ही दुखद हुआ. सुबह जब अखबार उठाया तो प्रभाष जी के देहांत की खबर प्रथम पृष्ठ पर पढ़ा.
प्रभाष जी के लेख मैं जनसत्ता और तहलका हिंदी पत्रिका में अक्सर पढता हूँ( दुर्भाग्यवश अब पढ़ने को नहीं मिलेगा ).
प्रभाष जी का जाना पत्रकारिता जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है. उनके स्थान को भर पाना सम्भव नहीं.
ईश्वर प्रभाष जी की आत्मा को शांति प्रदान करे......!!!
 

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शुभेच्छु

प्रबल प्रताप सिंह

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उत्तर प्रदेश, भारत

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