Sunday, May 15, 2011

 आप यह रचना पढ़ें और अपनी अमूल्य टिप्पणी या सुझाव afatima727@gmail.कॉम पर देने की कृपा करें ताकि इन्हें आगे लिखने की प्रेरणा मिलती रहे.

 ख्वाब एक हकीकत















ख्वाब है या कुछ और
ख्वाब ही सा लगता है.
बहरहाल, कुछ भी हो बड़ा हसीन है,
ख्वाब ही तो वो शहर है
जहां हम अपनी मर्जी के मालिक होते हैं.
ख्वाब और  हकीकत में एक 
अदना सा फासला है,
हकीकत मैं और ख्वाब आईना.
ख्वाब क्या है 
कुछ अधूरी ख्वाहिशें.
कुछ दिल में दफ़न अरमान
 कुछ आने वाले कल की तस्वीरें,
यही तो ख्वाब है!

ख्वाब देखो!
सच हो जाते हैं अक्सर ख्वाब.
आओ देखें मिलकर हम सब ख्वाब....!

हकीकत में तब्दील करने को...!!

 (लेखिका) डॉ. अमरीन फातिमा

5 comments:

  1. सपनों को क्या है सपने तो सपने ही होते हैं आख़िर

    ReplyDelete
  2. khwab hi to jindagi....kwab nahin to ummeed nahin aur umeed nahin to jindagi kahan. gahre ehsas ke sath sunder kavita.

    ReplyDelete
  3. क्या आप हमारीवाणी के सदस्य हैं? हमारीवाणी भारतीय ब्लॉग्स का संकलक है.


    अधिक जानकारी के लिए पढ़ें:
    हमारीवाणी पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि


    हमारीवाणी पर ब्लॉग प्रकाशित करने के लिए क्लिक कोड लगाएँ

    ReplyDelete