Saturday, December 1, 2018

आप बच्चे को क्या बनाना चाहते हैं?

प्रकृति ने सभी पंछियों की संरचना लगभग एक जैसी बनाई दो पैर दो पंजे चार से पांच अंगुलियों गर्दन और दो पंख
ऐसा कोई पंछी नहीं है जिसके चार पंख होते हैं!!!
लेकिन इन सबसे अलग हटकर एक नया मुकाम हासिल किया बाज नामक पक्षी ने जिसे हम ईगल या शाहीन भी कहते हैं जिस उम्र में बाकी परिन्दों के बच्चे चिचियाना सीखते हैं उस उम्र में एक मादा बाज अपने चूजे को पंजे मे दबोच कर सबसे ऊंचा उड़ जाती है ध्यान रहे पक्षियों की दुनिया में ऐसी Tough and tight training किसी और की नही होती।
गणित यानी चाल दूरी और वेग के दृष्टिकोण से देखें तो मादा बाज अपने चूजे को लेकर लगभग 12 किलोमीटर (A highest distance from earth where a natural creature can fly) ऊपर ले जाती है। हमारी आपकी "सोच" से बहुत ऊपर जितने ऊपर अमूमन जहाज उड़ा करते हैं और वह दूरी तय करने में मादा बाज 7 से 9 मिनट का समय लेती है।
उस मुकाम पर पहुंचकर वह एक परिस्थिति में स्थिर हो जाती है!!!!! और फिर यहां से शुरू होती है उस नन्हें चूजे की "कठिन परीक्षा" उसे अब यहां बताया जाएगा कि तू किस लिए पैदा हुआ है!!
तेरी दुनिया क्या है तेरी ऊंचाई क्या है तेरा धर्म बहुत ऊंचा है और फिर मादा बाज उसे अपने पंजों से छोड़ देती है.......
धरती की ओर ऊपर से नीचे आते वक्त लगभग 2 किलोमीटर उस चूजे को हवा नहीं होती कि उसके साथ क्या हो रहा है 7 किलोमीटर के अंतराल के आने के बाद उस चूजे के पंख जो कंजाइन से जकड़े होते हैं वह खुलने लगते हैं.....
लगभग 9 किलोमीटर आने के बाद उनके पंख पूरे खुल जाते हैं यह जीवन का पहला दौर होता है जब बाज का बच्चा पंख फड़फड़ाता है...
अब धरती से वह लगभग 3000 मीटर दूर है लेकिन अभी वह उड़ना नहीं सीख पाया है, अब बिल्कुल करीब आता है धरती के जहां से वह देख सकता है उसके स्वामित्व को अब उसकी दूरी धरती से बचती है महज 7 से 800 मीटर लेकिन उसका पंख अभी इतना मजबूत नहीं हुआ है की वो उड़ सके।
धरती से लगभग 4 से 500 मीटर दूरी पर उसे अब लगता है कि उसके जीवन की शायद अन्तिम यात्रा है फिर अचानक से एक पंजा उसे आकर अपनी गिरफ्त मे लेता है और अपने पंखों के दरमियान समा लेता है।
यह पंजा उसकी मां का था जो ठीक उसके उपर चिपक कर उड़ रही थी .....
और यह बाज के चूजे की पहली ट्रेनिंग थी और ये निरन्तर तब तक चलती रहती है जब तक कि उसका बच्चा उड़ना नहीं सीख जाता
ये ट्रेनिंग बिल्कुल एक कमांडो की तरह होती है High pressure and maximum risk... तब जाकर दुनिया को एक शाहीन/बाज़ मिलता है
जो आसमां की दुनिया का अघोषित बादशाह होता है
फिर एक समय आता है जब शाहीन अपने से दस गुना अधिक वजनी प्राणी का शिकार करता है.....
हिन्दी मे एक कहावत है
"बाज़ के बच्चे मुंगेर पर नही उड़ते"
अपनों बच्चों को चिपका कर रखिए पर एक शाहीन की तरह उन्हें दुनियां की मुश्किलों से रूबरू कराइए...
उन्हे लड़ना सिखाइए बिना आवश्यकता के संघर्ष करना सिखाइए......
ये टीवी के रियलिटी शो और अंग्रेजी स्कूल के बसों ने मिल कर आप के बच्चों को बाॅइलर मुर्गे जैसा बना दिया है जिसके पास मजबूत टंगड़ी तो है पर चल नही सकता वजनदार पंख तो है पर उड़ नही सकता......
पंख तो सड़क के किनारे कटने वाले मुर्गों के भी देती है प्रकृति!
फैसला करिए आपके बच्चे क्या बनेंगे???