Wednesday, August 24, 2011

 इस विधेयक का मसविदा केन्द्र में लोकपाल नामक संस्था की स्थापना के लिए तैयार किया गया है. लेकिन इस विधेयक के प्रावधान इस तरह के होंगे ताकि प्रत्येक राज्य में इसी तरह की लोकायुक्त संस्था स्थापित की जा सके.
जन लोकपाल विधेयक संस्करण 2.2

एक अधिनियम, जो केन्द्र में ऐसी प्रभावशाली भ्रष्टाचाररोधी और शिकायत निवारण प्रणाली तैयार करेगा, ताकि भ्रष्टाचार के विरुद्ध एक प्रभावी तन्त्र तैयार हो सके और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वालों को प्रभावी सुरक्षा मुहैया कराई जा सके.

1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ- 
इस अधिनियम को जन लोकपाल अधिनियम, 2010 कहा जा सकता है.
अपने अधिनियमन के 120वें दिन यह प्रभावी हो जाएगा.

2. परिभाषाएं- इस अधिनियम में, जब तक कि सन्दर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
`कार्रवाई´ का अर्थ है किसी भी सरकारी कर्मचारी द्वारा अपने कर्र्तव्य के निर्वहन के लिए की गई कोई कार्रवाई और जिसमें निर्णय, संस्तुति या निष्कर्ष अथवा अन्य किसी प्रकार की कार्रवाई सम्मिलित है, इसमें जानबूझकर विफलता, चूक या इसी तरह की अभिव्यक्ति करने वाली कार्रवाई भी शामिल होगी

`आरोप´ में किसी लोकसेवक के सम्बन्ध में निम्नलिखित में, से किसी भी बात की पुष्टि शामिल है-
1. वह सरकारी कर्मचारी है और कदाचार में लिप्त है
2. भ्रष्टाचार में लिप्त है.

`परिवाद´ में सम्मिलित है, कोई शिकायत या आरोप अथवा भ्रष्टाचार के विरुद्ध आवाज उठाने वाले व्यक्ति द्वारा सुरक्षा एवं उचित कार्रवाई के लिए किया गया अनुरोध.

`भ्रष्टाचार´ के अन्तर्गत वे सभी कृत्य सम्मिलित है, जो भारतीय दण्ड संहिता के अध्याय 9 अथवा भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम, 1988 के तहत दण्डनीय तय किए गए हैं.
साथ ही यदि किसी व्यक्ति ने किसी कानून या नियम का उल्लंघन करते हुए सरकार से कोई लाभ लिया हो, वह व्यक्ति और उसके साथ ही वे लोक सेवक जिन्होंने प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से लाभ लेने में उस व्यक्ति की सहायता की हो, भ्रष्टाचार में लिप्त माने जाएंगे.

`सरकार´ अथवा `केन्द्र सरकार´ से आशय है 'भारत सरकार'.

शासकीय कर्मचारी´ से आशय है कोई व्यक्ति, जिसकी नियुक्ति किसी भी समय लोक सेवा अथवा केन्द्र सरकार या उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय से सम्बन्धित किसी पद के लिए, प्रतिनियुक्ति अथवा स्थायी, अस्थायी या अनुबन्ध के आधार पर हुई है या हुई थी, लेकिन इसमें न्यायाधीश शामिल नहीं होंगे.

`शिकायत´ का अर्थ है किसी व्यक्ति द्वारा यह दावा कि उसे सिटीजन्स चार्टर के अनुसार और उस विभाग के जन शिकायत अधिकारी से सम्पर्क के बाद भी सन्तोषजनक समाधान नहीं मिल पाया.

`लोकपाल´ से आशय है -
3. इ4. स अधिनियम के अधीन एवं इ5. स अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के अन्तर्गत निर्धारित कार्य  के पालन हेतु गठित पीठें, अथवा
6. इ7. स अधिनियम के अन्तर्गत, या इ8. स अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के अन्तर्गत बनाये गये विभिन्न नियमों, विनियमों या आदेशों के अन्तर्गत नियत, तरीके और सीमा में, अपनी शक्तियों का उपयोग करने वाला और अपने कर्तव्यों एवं जिम्मेदारियों का निर्वहन करने वाला कोई अधिकारी या कर्मचारी
9. अन्य सभी प्रयोजनों के लिए, संस्था के तौर पर संयुक्त रूप से कार्यरत अध्यक्ष एवं सदस्य;

`अल्प दण्ड´ और `प्रमुख दण्ड´ से आशय वही होगा जो केन्द्रीय लोक सेवा आचरण नियमों में परिभाषित है.

`कदाचार´ का अर्थ है वही होगा जैसा कि केन्द्रीय लोक सेवा (आचरण) नियम में परिभाषित है और जिसमें सतर्कता का दृष्टिकोण हो

`लोक प्राधिकरण´ में सम्मिलित है कोई प्राधिकरण अथवा निकाय अथवा स्वशासी संस्था जिसकी स्थापना या गठन-
10. संविधान द्वारा अथवा संविधान के अन्तर्गत हुआ हो
11. संसद द्वारा बनाए गए किसी अन्य कानून द्वारा हुआ हो;
12. सरकार द्वारा जारी अधिसूचना अथवा आदेश, और सरकारी स्वामित्व, नियन्त्रित अथवा पर्याप्त अंश से वित्तपोषित संस्था

`लोक सेवक´ का अर्थ है, वह व्यक्ति जो किसी भी समय था अथवा है,-
13. प्रधानमन्त्री;
14. मन्त्री;
15. संसद सदस्य;
16. उच्च न्यायालयों और उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश;
17. सरकारी कर्मचारी;
18. अध्यक्ष अथवा उपाध्यक्ष (यथा नाम) अथवा स्थानीय प्राधिकरण का कोई सदस्य, जो कि केन्द्रीय सरकार के नियन्त्रण में हो अथवा एक सांविधिक निकाय अथवा निगम जिसका गठन भारतीय संसद द्वारा बनाए गए किसी कानून के अन्तर्गत हुआ हो, जिसमें सहकारी समिति भी सम्मिलित है, अथवा ऐसी सरकारी कम्पनी, जो कम्पनी अधिनियम 1956 की धारा 617 के अन्तर्गत अर्थ रखती हो, और सरकार द्वारा स्थापित कोई भी सांविधिक अथवा गैर सांविधिक समिति अथवा परिषद के सदस्य;
19. इ20. समें वे सभी सम्मिलित हैं, जो भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम 1988 की धारा 2 (सी) में `लोकसेवक´ घोषित हैं.
21. ऐसे अन्य प्राधिकारी, जो केन्द्र सरकार की अधिसूचना द्वारा, समय-समय पर उल्लिखित किए जाएं

`सतर्कता दृष्टिकोण´ में सम्मिलित है-
22. भ्रष्टाचार की सभी गतिविधियां
23. घोर लापरवाही अथवा जानबूझकर की गई लापरवाही, निर्णय लेने में कोताही, प्रणालियों और प्रकियाओं का घोर उल्लंघन, ऐसे मामलों में स्वविवेक अधिकार का अतिरेक जहां कोई प्रकट/सार्वजनिक हित स्पष्ट नहीं है, नियन्त्रणकर्ता अथवा वरिष्ठ अधिकारी को समय पर सूचित करने में चूक
24. अपने अधीनस्थ कर्मचारियों द्वारा कर्तव्यों की उपेक्षा अथवा कार्यालय के दुरुपयोग की शिकायत मिलने पर भी कार्रवाई में असफलता/विलम्ब, यदि कानून के अन्तर्गत किसी अधिकारी का ऐसा दायित्व बनता है तो,
25. प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से किसी के आचरण के माध्यम से भेदभाव में संलिप्तता.
26. भ्रष्टाचार के विरुद्ध आवाज उठाने वालों का उत्पीड़न
27. मामले के निस्तारण में किसी तरह का असंगत/अनुचित विलम्ब, सभी प्रासंगिक कारकों पर विचार करने के बाद, मामले में सतर्कता दृष्टिकोण की उपस्थिति निष्कर्ष को और सुदृढ़ता प्रदान करेगी.
28. किसी से अनुचित पूछताछ या जांच, भ्रष्टाचार के दोषी को अनावश्यक मदद पहुंचाने अथवा निर्दोष को फंसाने के लिए.
29. लोकपाल द्वारा समय-समय पर अधिसूचित कोई अन्य विषय सामग्री
`भ्रष्टाचार के विरुद्ध आवाज उठाने वाला´ व्यक्ति वह है, जो किसी खतरे का सामना करता है -
30. पेशेगत नुकसान, जिसमें गैरकानूनी स्थानान्तरण, प्रोन्नति से इ31. ंकार, उपयुक्त अनुलाभ से इ32. ंकार, विभागीय कार्यवाही, भेदभाव सम्मिलित है पर सीमित नहीं अथवा
33. शारीरिक क्षति अथवा
34. वास्तव में इ35. स तरह की क्षति;
जो कि या तो इस अधिनियम के अन्तर्गत लोकपाल से शिकायत करने, अथवा सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के अन्तर्गत याचिका दाखिल करने के कारण से सम्बन्धित है अथवा भ्रष्टाचार अथवा कुशासन को उजागर करने अथवा रोकने के उद्देश्य से की गई कोई अन्य विधिक कार्रवाई.

3. लोकपाल संस्था की स्थापना और लोकपाल की नियुक्ति:
लोकपाल नामक एक संस्था होगी, जिसमें अपने अधिकारियों और कर्मचारियों के सहित एक अध्यक्ष और दस सदस्य होंगे.
लोकपाल के अध्यक्ष और सदस्यों का चुनाव उसी तरह होगा, जैसा कि इस अधिनियम में बताया गया है.
लोकपाल के अध्यक्ष अथवा सदस्य के तौर पर नियुक्त व्यक्ति को, अपना कार्यभार सम्भालने से पूर्व, निर्धारित प्रारूप में राष्ट्रपति के समक्ष शपथ अथवा प्रतिज्ञान लेना होगा.
इस अधिनियम के लागू होने के छ: माह के अन्दर सरकार पहले पहले लोकपाल के अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति सरकार करेगी, और सभी प्रचालन तन्त्र एवं परिसम्पत्तियों के साथ संस्था का गठन हो जाएगा.
सरकार -
1. सेवानिवृत्ति, सदस्य अथवा अध्यक्ष की सेवानिवृत्ति के तीन माह पूर्व, अथवा
2. किसी अन्य अनपेक्षित कारण से इ3. स तरह की रिक्ति उत्पन्न होने के एक माह के भीतर. लोकपाल के अध्यक्ष और सदस्य की नियुक्ति करेगी

4. लोकपाल के अध्यक्ष और सदस्यगण कुछ विशेष कार्यालयों से सबन्द्ध नहीं रहेंगे-लोकपाल के अध्यक्ष एवं सदस्यगण संसद या किसी राज्य की विधायिका के मौजूदा सदस्य नहीं होंगे या किसी पद या लाभ के न्यास में (अध्यक्ष या सदस्य के पद के अलावा) नहीं रहेंगे या किसी अन्य व्यवसाय या पेशे में नहीं होंगे, अपना कार्यभार सम्भालने से पूर्व, लोकपाल का अध्यक्ष अथवा सदस्य चुना गया व्यक्ति -
यदि वह किसी न्यास अथवा लाभ के पद पर है, उस पद से त्यागपत्र दे देगा, या
यदि वह कोई व्यवसाय कर रहा है, उस व्यवसाय के कार्य व्यवहार अथवा प्रबन्धन से अपना सम्बन्ध समाप्त कर लेगा; या
यदि वह किसी पेशे में है तो उस पेशे को स्थगित करना होगा
यदि वह प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से किसी अन्य गतिविधि से जुड़ा हुआ है, जिसकी वजह से लोकपाल में उसके दायित्वों के प्रदर्शन में हितों का टकराव सम्भव है, उसे उस गतिविधि से अपना जुड़ाव खत्म कर देना होगा.
उपबन्ध किया गया है कि यदि उस काम के छोड़ देने के बाद भी, उस गतिविधि से जिससे वह पूर्व में जुड़ा था, से लोकपाल में उसके प्रदर्शन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की सम्भावना है, वह व्यक्ति लोकपाल का अध्यक्ष अथवा सदस्य नियुक्त नहीं किया जा सकेगा.

5. लोकपाल का कार्यकाल एवं अन्य सेवा शर्तें-
लोकपाल के अध्यक्ष अथवा सदस्य के रूप में नियुक्त व्यक्ति का कार्यकाल कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से पांच साल या 70 वर्ष की उम्र, जो भी पहले हो, होगा.
आगे यह भी उपबन्ध है कि
1. लोकपाल का अध्यक्ष अथवा सदस्य, राष्ट्रपति को सम्बोधित हस्तलिखित पत्र के जरिए पद त्याग सकता है;
2. अध्यक्ष अथवा सदस्य को इ3. स अधिनियम में निहित तरीके से पद से हटाया जा सकता है.
अध्यक्ष और प्रत्येक सदस्य को प्रति माह क्रमश: भारत के मुख्य न्यायाधीश और उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों के बराबर वेतन मिलेगा.
अध्यक्ष अथवा सदस्य के लिए देय भत्ते व पेंशन और अन्य सेवा शर्तें वहीं होंगी, जैसा निर्धारित किया जाए.
परन्तु अध्यक्ष अथवा सदस्य को देय भत्ते व पेंशन और अन्य सेवा शर्तें उसकी नियुक्ति के बाद उसके लिए बदली नहीं जाएंगी.
लोकपाल कार्यालय के प्रशासनिक व्यय, जिसमें देय वेतन, भत्ते और पेंशन शामिल हैं, अथवा उस कार्यालय में कार्य कर रहे व्यक्तियों के सम्बन्ध में, भारत की संचित निधि पर भारित होगा.
`लोकपाल निधि´ के नाम से एक अलग निधि होगी, जिसमें लोकपाल द्वारा लगाए गए दण्ड/जुर्माने जमा होंगे और जिसमें इस अधिनियम की धारा 19 के अन्तर्गत वसूले गए सार्वजनिक धन के नुकसान का 10 फीसदी भी सरकार द्वारा जमा किया जाएगा. इस निधि का निस्तारण पूरी तरह लोकपाल के विवेक पर होगा और इस निधि का प्रयोग लोकपाल को बढ़ाने/उन्नयन/बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए ही किया जाएगा.
लोकपाल के अध्यक्ष एवं सदस्यगण भारत सरकार या किसी राज्य सरकार अथवा ऐसे किसी निकाय, जो सरकार द्वारा वित्तपोषित हो, में किसी भी पद पर नियुक्ति या संसद, राज्यों की विधायिका अथवा स्थानीय निकायों का चुनाव लड़ने के पात्र नहीं होंगे, यदि उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे देने के बाद अध्यक्ष अथवा सदस्य के तौर पर किसी भी अवधि के लिए कोई पद ग्रहण किया है. किसी सदस्य को अध्यक्ष नियुक्त किया जा सकता है, बशर्ते सदस्य और अध्यक्ष के तौर पर उसका कार्यकाल पांच वर्ष से अधिक न हो और कोई भी सदस्य अथवा अध्यक्ष पांच साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद पुनर्नियुक्ति  या सेवा विस्तार का पात्र नहीं होगा.

6. अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति
अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति एक चयन समिति की संस्तुति पर राष्ट्रपति द्वारा की जाएगी.
निम्नलिखित लोग लोकपाल के अध्यक्ष एवं सदस्य बनने के पात्र नहीं होंगे:
4. कोई व्यक्ति, जो भारत का नागरिक नहीं है.
5. कोई व्यक्ति जिसे भारतीय दण्ड संहिता, अपराध संहिता अथवा किसी अन्य अधिनियम के तहत आरोपित किया गया हो अथवा सीसीएस आचरण नियमों के तहत दण्डित किया गया हो.
6. कोई व्यक्ति जिसकी उम्र 40 वर्ष से कम हो.
7. कोई व्यक्ति जो किसी भी सरकार की सेवा में था और पिछले दो वर्षों के भीतर कार्यालय छोड़ दिया था, या तो त्यागपत्र अथवा सेवानिवृत्ति के माध्यम से.
लोकपाल के कम से कम चार सदस्य विधिक पृष्ठभूमि के होंगे. अध्यक्ष सहित दो से अधिक सदस्य पूर्व नौकरशाह नहीं होंगे.
स्पष्टीकरण: ‘कानूनी पृष्ठभूमि’ का तात्पर्य है कि वह व्यक्ति भारत में कम से कम दस सालों तक न्यायिक सेवा में पद सम्भाल चुका हो अथवा उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय में कम से कम 15 साल तक अधिवक्ता रहा हो.
सदस्यों और अध्यक्ष की निष्ठा असन्दिग्ध हो और पूर्व में उन्होंने भ्रष्टाचार से लड़ने के संकल्प का प्रदर्शन किया हो.
चयन समिति में निम्नलिखित लोग होंगे
1. भारत के प्रधानमन्त्री
2. लोकसभा में नेता विपक्ष
3. उच्चतम न्यायालय के सबसे कम उम्र के दो न्यायाधीश
4. उच्च न्यायालयों के सबसे कम उम्र के दो न्यायाधीश
5. भारत के नियन्त्रक एवं महालेखा परीक्षक
6. मुख्य निर्वाचन आयुक्त
7. प्रथम चयन प्रक्रिया के बाद से लोकपाल के अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त होने वाले सदस्य,
प्रधानमन्त्री चयन समिति के अध्यक्ष के रूप में कार्य करेगा.
चयन समिति के विचारार्थ योग्य उम्मीदवारों की सूची तैयार करने हेतु एक खोज कमेटी होगी, जिसमें दस सदस्य होंगे
खोज समिति के सदस्यों का चयन निम्नलिखित तरीके से होगा;
8. चयन समिति भारत के पूर्व नियन्त्रक एवं महालेखा परीक्षकों और भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्तों में से खोज समिति के पांच सदस्यों का चयन करेगी.
परन्तु निम्नलिखित लोग खोज समिति के सदस्य बनने के पात्र नहीं होंगे:
(i) कोई व्यक्ति जिसके विरुद्ध विधिवत (सारभूत) भ्रष्टाचार का आरोप लग चुका हो.
(ii) कोई व्यक्ति जो सेवानिवृत्ति के बाद किसी राजनीतिक दल में शामिल हो गया हो अथवा किसी राजनीतिक दल से उसका गहरा जुड़ाव रहा हो.
(iii) कोई व्यक्ति जो किसी भी रूप में सरकार की सेवा कर रहा हो.
(iv) कोई व्यक्ति जो सेवानिवृत्ति के बाद भी सरकारी कार्य कर रहा हो, उन कार्यों  को छोड़कर जो कि उस पद के लिए आरक्षित हैं, जिससे वह सेवानिवृत्त हुआ हो.
9. चयनित उपरोक्त पांच सदस्य, नागरिक समाज से पांच सदस्यों को मनोनीत करेंगे.

खोज समिति ऐसे वर्ग के लोगों अथवा ऐसे व्यक्तियों से संस्तुति अमन्त्रित करेगी, जिन्हें वह इसके लिए उचित समझती हो. इस संस्तुति में अन्य विषयों के साथ-साथ अधोलिखित विवरण होने अनिवार्य हैं.
10. जिस प्रत्याशी की संस्तुति की गई है, उसका व्यक्तिगत विवरण.
11. प्रत्याशी ने अतीत में अगर किसी कानूनी आरोप या नैतिक भ्रष्टाचार के आरोप का सामना किया है तो उसका पूरा विवरण.
12. भ्रष्टाचार के खिलाफ अतीत में उसके द्वारा किए गए प्रयासों का लिखित प्रमाण.
13. अतीत का ऐसा विवरण जो यह दर्शाता हो कि वह अपने विवेक से निर्णय करता है और किसी भी तरह उसे प्रभावित नहीं किया जा सकता, यदि कोई हो तो.
14. कोई अन्य सामग्री, जिसका निर्णय खोज समिति करे.
चयन के लिए अधोलिखित प्रक्रिया का अनुसरण किया जाएगा -
15. प्रत्याशियों की सूची उनके समूचे विवरण के साथ, जो उन्होंने उपरोक्त प्रारूप में दिया हो, उसे वेबसाइ16. ट पर प्रदर्शित किया जाएगा.
17. इ18. न नामों पर जनता की प्रतिक्रिया मांगी जाएगी.
19. खोज समिति इ20. न प्रत्याशियों की पृष्ठभूमि और पहले किए गए कार्यों से सम्बन्धित सूचनाएं जुटाने के लिए कोई भी माध्यम इ21. स्तेमाल कर सकती है.
22. प्रत्याशियों के बारे में एकत्रित सभी सामग्री खोज समिति के हर सदस्य को अग्रिम तौर पर उपलब्ध कराई जाएगी. समिति के सदस्य हर प्रत्याशी का अपनी ओर से आंकलन करेंगे.
23. समिति मिलकर हरेक उम्मीदवार के बारे में प्राप्त सामग्रियों पर चर्चा करेगी. चयन मुख्यत: सर्वसम्मति के आधार पर किया जाएगा.
परन्तु जांच समिति के तीन या अधिक सदस्य अगर लिखित कारणों के आधार पर किसी सदस्य के चयन पर आपत्ति करते हैं तो उसका चयन नहीं किया जाएगा.
24. खोज समिति कुल रिक्तियों की तीन गुना संख्या के बराबर नामों की सूची बनाकर चयन समिति के विराचार्थ प्रस्तुत करेगी
25. चयन समिति, रिक्तियों की संख्या के बराबर संख्या में प्रत्याशियों का चयन कर प्रधानमन्त्री को देगी. चयन मुख्यत: सर्वसम्मति के आधार पर किया जाएगा.
परन्तु अगर चयन समिति के तीन या अधिक सदस्य किसी सदस्य के चयन का विरोध लिखित रूप में देते हैं, तो उस व्यक्ति का चयन नहीं होगा.
26. खोज समिति की सभी बैठकें और सभी चयन की वीडियो रिकॉर्डिंग होगी और इ27. से सार्वजनिक किया जाएगा.
चयन समिति द्वारा तय किए गए नामों की अनुशंसा प्रधानमन्त्री तत्काल राष्ट्रपति से करेंगे, जो इस अनुशंसा प्राप्ति के एक महीने के भीतर नियुक्ति का आदेश जारी करेंगे.
अगर चयन समिति का कोई सदस्य चयन प्रक्रिया के जारी रहने के दौरान ही सेवानिवृत हो जाता है तो उस स्थिति में वह सदस्य चयन समिति में तब तक बना रहेगा, जब तक कि चयन प्रक्रिया पूरी न हो जाए.

7. अध्यक्ष अथवा सदस्यों को हटाना -
अध्यक्ष या किसी सदस्य को केवल राष्ट्रपति के आदेश से तभी उसके पद से हटाया जा सकता है जबकि निम्न में से कोई एक या अधिक आधार हो -
28. कदाचार प्रमाणित होने पर
29. पेशागत, मानसिक या शारीरिक अक्षमता
30. दिवालिया
31. नैतिक भ्रष्टाचार से सम्बद्ध आरोप लगने पर
32. पद पर रहते हुए किसी दूसरे वैतनिक कार्यों में लिप्त पाए जाने पर
33. ऐसे आर्थिक लाभ या अन्य लाभ हासिल करने पर जो उस व्यक्ति के सदस्य या अध्यक्ष के रूप में कार्य को प्रभावित कर सकता है.
34. अपने पास विचाराधीन मामले में, किसी का पक्ष लेने के उद्देश्य से अथवा किसी को फंसाने के उद्देश्य से, बाहरी प्रभाव द्वारा निर्देशित/संचालित होने पर
35. किसी सरकारी अधिकारी को अनुचित रूप से प्रभावित करने या प्रभावित करने का प्रयास करने पर.
36. ऐसी कोई चूक या ऐसा कोई कार्य करने पर, जो भ्रष्टाचार निरोधी कानून के तहत दण्डनीय है, या किसी कदाचार में लिप्त पाए जाने पर.
37. यदि कोई सदस्य या अध्यक्ष किसी भी तरीके से, भारत  सरकार अथवा किसी प्रदेश सरकार द्वारा या उसके किसी अधिकारी या उसके प्रतिनिधि द्वारा स्थापित अनुबन्ध या समझौते में रुचि रखता हो या उससे सम्बद्ध हो, या उससे होने वाले लाभों से अथवा उससे होने वाली किसी तरह की आय से सदस्य के अलावा किसी और तरह से सम्बन्ध रखता हो, या किसी निगमित कम्पनी से सम्बद्ध हो, उसे कदाचार का दोषी समझा जाएगा.
लोकपाल के किसी सदस्य या अध्यक्ष को निष्कासित करने के लिए अधोलिखित प्रक्रिया का अनुसरण करना होगा.
1. कोई भी व्यक्ति लोकपाल के एक या अधिक सदस्यों या अध्यक्ष के खिलाफ ठोस सबूत पेश करते हुए उसके निष्कासन की याचिका पेश कर सकता है.
2. ऐसी याचिका प्राप्त होने पर सुप्रीम कोर्ट इ3. सकी सुनवाई करेगा और अधोलिखित में से एक या एक से अधिक कदम उठा सकता है:
(i) सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त विशेष जांच दल को जांच का आदेश, यदि प्रथम दृष्टया इ(ii) सकी आवश्यकता महसूस होती है और अगर सम्बन्धित पक्षों द्वारा दायर हलफनामों से इ(iii) सका निर्णय करना सम्भव न हो सके. विशेष जांच दल तीन महीने के अन्दर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा.
(iv) विशेष जांच दल द्वारा उपबन्ध (1) के तहत जांच लम्बित होने पर, उस सदस्य से आंशिक अथवा पूरा काम वापस ले लेने का आदेश देना
(v) कोई मामला न बनने की स्थिति में याचिका रद्द करना
(vi) आधारों की पुष्टि होने पर, सम्बन्धित सदस्य अथवा अध्यक्ष को हटाने की अनुशंसा राष्ट्रपति के पास भेजना
(vii) यदि प्रथमदृष्टया भ्रष्टाचार निरोधी कानून या किसी अन्य कानून के तहत किसी दण्डनीय अपराध का मामला बनता हो तो समुचित एजेंसी को केस दर्ज करने और जांच का निर्देश देना

4. सुप्रीम कोर्ट के पांच वरिष्ठतम न्यायधीशों के पैनल की पीठ बनेगी. परन्तु अगर इ5. न न्यायाधीशों में से कोई भी कभी चयन समिति का सदस्य रहा हो या जिसके खिलाफ कोई मामला लोकपाल के समक्ष लम्बित हो, वह उस पीठ का सदस्य नहीं हो सकेगा.
6. सुप्रीम कोर्ट ऐसी याचिकाओं को इ7. स आधार पर ख़ारिज नहीं कर सकता कि उसके खिलाफ पहले से ऐसा ही मामला विचाराधीन है.
8. अगर सुप्रीम कोर्ट को लगता है कि याचिका नुकसान पहुंचाने की मंशा या बुरी नीयत से दायर की गई है तो अदालत शिकायतकर्ता पर जुर्माना लगा सकती है या उसे एक साल तक कैद की सजा सुना सकती है.
9. सुप्रीम कोर्ट से उपयुर्क्त उपबन्ध (ख)(iv) में अनुशंसा मिलने की स्थिति में प्रधानमन्त्री, सदस्य या सदस्यों अथवा लोकपाल के अध्यक्ष को तत्काल हटाए जाने की अनुशंसा राष्ट्रपति से करनी होगी जो उस सदस्य या सदस्यों अथवा अध्यक्ष को अनुंशसा प्राप्त होने के एक महीने के भीतर हटाने का आदेश जारी करेंगे.      

लोकपाल की शक्तियां एवं कार्य

8. लोकपाल के कार्य:
लोकपाल ऐसी शिकायतों की प्राप्तियों के लिए उत्तरदायी होगा जिनमें-
1. जिसमें भ्रष्टाचार निरोधक कानून के अधीन चूक के आरोप हों या दण्डनीय — कृत्य के आरोप लगाए गए हों,
2. जहां सरकारी सेवक पर दुर्व्यवहार के आरोप हों,
3. शिकायत
4. भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाने वालों से मिली शिकायतें,
5. लोकपाल के कर्मचारियों के खिलाफ शिकायतें

(1क) अपने कर्मचारियों की अखण्डता सुनिश्चित करना, चाहे वह स्थाई हों अथवा अन्य, लोकपाल का मुख्य कर्र्तव्य होगा. लोकपाल इसे यह सुनिश्चित करने के लिए पूर्णत सक्षम एवं सशक्त होगा.

लोकपाल, जांच एवं पूछताछ के बाद, जैसा वह उचित समझे, निम्नलिखित कार्यों में से एक या एकाधिक कार्रवाई कर सकता है:
6. अगर प्रथम दृष्टया शिकायत नहीं बनती है तो मामला बन्द करना, अथवा
7. सरकारी कर्मचारी और साथ ही साथ उस व्यक्ति, जो इ8. स कृत्य में पक्षकार है, के खिलाफ आरोप- पत्र दाखिल करना
9. अगर सरकारी कर्मचारी भ्रष्टाचार निरोधक कानून के अधीन अन्तत: दोषी पाया जाता है तो सुसंगत आचार संहिता के तहत उस पर युक्तियुक्त दण्ड आरोपित करने की अनुशंसा करना और उस सरकारी कर्मचारी की बर्खास्तगी की भी सुनिश्चित सिफारिश करना
10. जांच के अधीन विषयगत यदि किसी लाइ11. सेंस या पट्टा या स्वीकृति या ठेका या समझौते को रद्द करने अथवा संशोधित करने का आदेश दे सकता है
12. अगर भ्रष्टाचार के कृत्य में सम्बन्धित प्रतिष्ठान या कम्पनी या ठेकेदार या किसी अन्य को शामिल पाया जाता है तो उसे प्रतिबन्धित सूची में डालने का आदेश देना
13. इ14. स अधिनियम के प्रावधानों के मुताबिक, समुचित अधिकारियों को शिकायतों के निवारण के लिए उपयुक्त दिशा निर्देश जारी करना
15. अगर लोकपाल के आदेश का विधिवत अनुपालन नहीं होता है, तो उन आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए इ16. स अधिनियम के तहत आदेश जारी करना
17. इ18. स अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के अनुसार भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाने वालों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए जरूरी कार्रवाई करना

अगर किसी भी मामले में लोकपाल को किसी स्रोत से जानकारी हो है, तो वह इस अधिनियम के अन्तर्गत, अगर इस तरह का कोई मामला उपबन्ध (1) की धारा (क), (ख), (ग) या (घ) में उल्लेखित है, स्वत: संज्ञान लेते हुए कार्रवाई कर सकता है.

समय-समय पर जरूरत पड़ने पर समुचित अधिकारी को उनके कामकाज, प्रशासन एवं अन्य व्यवस्था में परिवर्तन के लिए दिशा-निर्देश जारी कर सकता है, ताकि भ्रष्टाचार, दुर्व्यवहार, जन शिकायत एवं भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाने वालों की प्रताड़ना की गुंजाइश और सम्भावना कम हो सके

इस धारा की उपधारा (2) (ग) के अन्तर्गत लोकपाल द्वारा जारी किए गए आदेश सरकार के लिए बाध्यकारी होंगे और आदेश मिलने के एक सप्ताह के अन्दर उसका कार्यान्वयन जरूरी होगा.

भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 19 को समाप्त कर दिया जाएगा. इस अधिनियम के कार्यान्वयन में दिल्ली विशेष पुलिस संस्थापना अधिनियम की धारा 6-क लागू नहीं होगी.

इस अधिनियम की किसी भी कार्यवाही में अपराध प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 197 लागू नहीं होगी. किसी भी कानून के तहत लोकपाल से एक बार स्वीकृति मिल जाने के बाद, ऐसी सभी स्वीकृतियां, जो आरम्भिक जांच के लिए जरूरी हैं, प्रदत्त मानी जाएंगी.

9. सर्च वारण्ट जारी होना आदि-
जहां लोकपाल, अपने पास उपलब्ध सूचना के आधार पर
19. अगर यह यकीन करने का कोई कारण देखता है, कि कोई व्यक्ति-
(i) जिसे इ(ii) स अधिनियम के अन्तर्गत सम्मन या नोटिस जारी किया गया है या जारी किया जा सकता है, जो किसी जांच के लिए ज़रूरी या उपयोगी कोई सम्पत्ति दस्तावेज या अन्य कोई वस्तु प्रस्तुत नहीं करेगा, या नहीं कर पाएगा, या प्रस्तुत नहीं करने की वजह होगा,
(iii) जिसके कब्जे में मुद्रा, स्वर्ण, आभूषण या दूसरी मूल्यवान चीजें या वस्तुएं हैं और ऐसी मुद्रा, स्वर्ण, आभूषण या दूसरी मूल्यवान चीजें हैं जिनकी घोषणा, सम्पत्ति की घोशणा करने सम्बन्धी किसी भी प्रभावी कानून के अन्तर्गत सक्षम प्राधिकार के समक्ष,  अंशत: या पूर्णत: नहीं की गई है
ख. विचार करता हो कि उसके द्वारा आरम्भ की गई किसी भी जांच या अन्य कार्रवाई का उद्देश्य, सामान्य खोज या निरीक्षण द्वारा पूरा होगा,
सर्च वारण्ट के ज़रिए किसी ऐसे पुलिस अधिकारी को, जिसका ओहदा पुलिस इंस्पेक्टर से नीचे नहीं होगा, तलाशी लेने, निरीक्षण करने के लिए तदानुसार अधिकृत करेगा, और ऐसा करने के लिए वह अधिकारी-
(i) किसी भी इ(ii) मारत या स्थान, जहां उसे ऐसी किसी सम्पत्ति, दस्तावेज, रकम, स्वर्ण, आभूषण या अन्य मूल्यवान वस्तु के रखे जाने के सन्देह का कारण हो, वह प्रवेश कर सकेगा और तलाशी ले सकेगा.
(iii) किसी ऐसे व्यक्ति की तलाशी ले सकेगा जिस पर कि स्वयं को छिपाने या किसी वस्तु को छिपाने का सन्देह हो.
(iv) वह उप नियम-(i) के अन्तर्गत प्राप्त शक्तियों के तहत ऐसा कोई भी दरवाजा, बक्सा, लॉकर, सेफ, आलमारी या अन्य पात्र धारक का ताला तोड़ सकेगा जिसकी चाबी उपलब्ध नहीं है.
(v) ऐसी तलाशी में प्राप्त किसी सम्पत्ति, दस्तावेज, रकम, स्वर्ण, आभूषण या अन्य कीमती चीजों जब्त करे
(vi) किसी भी सम्पत्ति या दस्तावेज पर पहचान के चिन्ह बनाए ताकि कोई उसे निकाल न सके अथवा उसकी नकल न कर सकें.
(vii) ऐसी किसी भी सम्पत्ति, दस्तावेज, पैसे, स्वर्ण, आभूषण या अन्य मूल्यवान वस्तुओं या चीजों को सूचीबद्ध कर दर्ज किया जाएगा.

उपधारा (1) के तहत तलाशी एवं जब्ती में, यथासम्भव, अपराध प्रक्रिया संहिता, 1973 के सम्बन्धित प्रावधान लागू होंगे

उपधारा (1) के अधीन सभी उद्देश्यों के लिए जारी सभी वारण्ट, अपराध प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 93 के अधीन अदालत द्वारा जारी वारण्ट समझा जाएगा.

10. साक्ष्य-
इस अधिनियम के प्रावधानों के अन्तर्गत किसी भी जांच के उद्देश्य से, (अगर कोई प्रारम्भिक जांच है, सहित) लोकपाल किसी भी सरकारी कर्मचारी या कोई अन्य व्यक्ति, जो उनकी राय में किसी जांच के लिए प्रासंगिक सूचना उपलब्ध कराने या दस्तावेज देने में सक्षम है, सूचना देने अथवा दस्तावेज़ प्रस्तुत कराने के लिए तलब कर सकेगा.

लोकपाल को नागरिक प्रक्रिया संहिता, 1908 के अन्तर्गत कोई याचिका दायर करते हुए, निम्नलिखित मामलों में, ऐसी किसी भी जांच के उद्देश्य से (आरम्भिक जांच सहित) वे सारी शक्तियां प्राप्त होंगी जो नागरिक प्रक्रिया संहिता, 1908 के अन्तर्गत किसी प्रकार का निपटारा करते हुए दीवानी न्यायालय को प्राप्त हैं -
1. किसी भी व्यक्ति को उपस्थित रहने के लिए बाध्य करने और उसे सम्मन जारी करने और उससे शपथ लेना;
2. किसी भी दस्तावेज की खोज एवं उसे प्रस्तुत करना;
3. हलफनामे पर साक्ष्य प्राप्त करना;
4. किसी न्यायालय या कार्यालय से कोई सार्वजनिक रिकार्ड या उसकी प्रतिलिपि हासिल करना;
5. दस्तावेज या गवाह की जांच के के लिए आदेश जारी करना;
6. गलत या अफसोसनाक दावा या रक्षा के आलोक में क्षतिपूर्ति भुगतान का आदेश;        
7. देरी के लिए हर्जाने का आदेश
8. ऐसे अन्य मामले, जिन्हें निर्धारित किया जा सकता है

लोकपाल के सम्मुख कोई भी कार्रवाई भारतीय दण्ड संहिता की धारा 193 के अर्थ में एक न्यायिक कार्रवाई समझी जाएगी.

11. लोकपाल की रिपोर्ट इत्यादि-
लोकपाल के अध्यक्ष, प्रतिवर्ष, राष्ट्रपति को अपने कार्य निष्पादन पर, निर्धारित प्रारूप में प्रतिवेदन पेश करेंगे.

राष्ट्रपति, प्रतिवेदन की प्रति, व्याख्यात्मक ज्ञापन देते हुए संसद के दोनों सदनों में रखवाएंगे.

लोकपाल हरेक महीने अपनी वेबसाइट पर ऐसे मामलों की एक सूची, संक्षिप्त विवरण, परिणाम एवं कृत अथवा प्रस्तावित कार्रवाई के विवरण के साथ प्रकाशित करेगा, इस वेबसाइट पर पिछले एक महीने में लोकपाल द्वारा प्राप्त मामलों की सूची, निपटाए गए, और लम्बित पड़े मामलों की सूची भी भी प्रकाशित की जाएगी.

12. लोकपाल एक मान्य पुलिस अधिकारी होगा
अपराध प्रक्रिया संहिता की धारा 36 के उद्देश्य के लिए, लोकपाल के अध्यक्ष, सदस्य और इसकी जांच शाखा के अधिकारियों को पुलिस अधिकारी माना जाएगा.

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत किसी अपराध की छानबीन करते हुए वे उस मामले में किसी दूसरे कानून के अन्तर्गत किसी अपराध की जांच के लिए भी सक्षम होंगे.

13. आदेशों की अवज्ञा में लोकपाल की शक्ति-
लोकपाल के प्रत्येक आदेश में उन अधिकारियों का नाम पूरी तरह स्पष्ट किया जाएगा, जो उसे अमल में लाएंगे, आदेश के अमल में लाने की प्रक्रिया और उसके अनुपालन की समय सीमा का विवरण भी स्पष्ट दिया जाएगा.

अगर लोकपाल के आदेश का क्रियान्वयन निर्धारित प्रक्रिया और समय सीमा के भीतर नहीं होता है तो लोकपाल अवमानना के दोषी अधिकारियों पर जुर्माना लगाने का निर्णय ले सकता है.

सम्बन्धित विभाग के आरेखण और संवितरण अधिकारी को, उपधारा (2) के तहत जारी आदेश में उल्लेखित, जुर्माना अधिकारियों के वेतन में से काटने का निर्देश दिया जाएगा.
परन्तु जिन अधिकारियों पर जुर्माना लगेगा, उन्हें सुनवाई का एक मौका दिए बिना उनका वेतन नहीं कटेगा. यह भी कि अगर आरेखण और संवितरण अधिकारी इन अधिकारियों का वेतन काटने में असमर्थ होता है तो वह स्वंय ही इस दण्ड के लिए उत्तरदायी होगा.

अपने आदेश की अनुपालना कराने के लिए, लोकपाल के पास वे सभी अधिकार क्षेत्र, शक्तियां एवं अधिकार  होंगे जोकि उच्च न्यायालय के पास हैं, और लोकपाल अपनी अवमानना के सम्बन्ध में इनका प्रयोग कर सकेगा, और इस उद्देश्य के लिए न्यायालय की अवमानना अधिनियम १९७१ (1971 का केन्द्रीय अधिनियम 70) को संशोधित करते उच्च न्यायालय के लिए निहित सन्दर्भ में लोकपाल की अवमानना को भी शामिल किया जाता है.

13क. भ्रष्टाचार अधिनियम की निवारण धारा 4 के तहत विशेष न्यायाधीश
(1) वार्षिक आधार पर, लोकपाल विशेष भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम 1988 की धारा 4 के तहत हर क्षेत्र में न्यायाधीशों की संख्या का आंकलन करेगा और सिफारिश के तीन महीने के भीतर ही सरकार उतनी ही संख्या में न्यायाधीशों की नियुक्ति करेगी.
परन्तु यह भी कि लोकपाल विशेष न्यायाधीशों की उतनी ही संख्या की सिफारिश करेगा जितनी कि इस अधिनियम के तहत प्रत्येक मामले का निपटारा एक वर्ष के भीतर होने के लिए आवश्यक होंगी.

कोई नई नियुक्ति करने से पहले, सरकार, उम्मीदवारों की निष्ठा सुनिश्चित करने हेतु, चयन प्रक्रिया पर लोकपाल से परामर्श करेगी. सरकार उन सिफारिशों को लागू भी करेगी.

13ख. अनुरोध पत्र जारी करना: लोकपाल की खण्डपीठ को लोकपाल में लम्बित किसी मामले में अनुरोध पत्र (एक न्यायाधीश को दूसरे न्यायाधीश द्वारा जारी किए जाना वाला) जारी करने का अधिकार होगा.

13ग. भारतीय तार अधिनियम के तहत अधिकार: लोकपाल की खण्डपीठ, भारतीय तार अधिनियम की धारा 5 के तहत पदनामित प्राधिकरण मान्य होगी. इस पीठ को टेलीफोन, इण्टरनेट अथवा भारतीय तार अधिनियम तथा, सूचना और प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 तथा भारतीय तार अधिनियम 1885 के तहत जारी नियमावली के सहित, दायरे में आने वाले अन्य माध्यम इत्यादि पर संचरित सन्देशों, आकड़ों और आवाजों पर निगरानी रखने या उन्हें रोककर सुनने का अधिकार होगा.

लोकपाल की कार्यप्रणाली
14. लोकपाल की कार्यप्रणाली:
अध्यक्ष लोकपाल की संस्था के समग्र प्रशासन और पर्यवेक्षण के लिए उत्तरदायी होगा.

नीति-नियम निर्धारण सहित लोकपाल के कामकाज के लिए आन्तरिक प्रणाली विकसित करने, लोकपाल में विभिन्न अधिकारियों को कार्य देने, लोकपाल में विभिन्न पदाधिकारियों को अधिकार देने जैसे कार्य लोकपाल के अध्यक्ष एवं सदस्यों द्वारा एक संस्था के तौर पर सामूहिक रूप से किए जाएंगे.

लोकपाल के अध्यक्ष की प्रधानमन्त्री के साथ वित्त और कर्मचारियों की जरूरत के आकलन के लिए वार्षिक बैठक होगी. इस बैठक में हुए निर्धारण के आधार पर सरकार द्वारा लोकपाल को संसाधन प्रदान कराए जाएंगे.

(3क) निर्धारित व्यय भारत के समेकित निधि से दिया जाएगा.

(3ख) लोकपाल के अध्यक्ष और सदस्य अपने कर्मचारियों की अखण्डता और सभी तरह की पूछताछ और जांच की अखण्डता सुनिश्चित करने के लिए हर सम्भव कदम उठाएंगे. इस उद्देश्य के लिए वे अयोग्य अथवा भ्रष्ट कर्मियों को त्वरित सज़ा देने हेतु नियम बनाने, काम का मानदण्ड निर्धारित करने, प्रक्रिया निर्धारित करने अथवा अन्य कोई कदम उठाने के लिए सक्षम होंगे.

(3ग) लोकपाल के अध्यक्ष और सदस्य अधिनियम द्वारा सुनिश्चित समय सीमा का कड़ाई से पालन कराने के लिए ज़िम्मेदार होंगे और समुचित कदम उठाने के लिए सक्षम होगें.

(3घ) लोकपाल पूरी तरह से प्रशासनिक, वित्तीय और कार्यात्मक सहित सभी मामलों में सरकार के हस्तक्षेप से स्वतन्त्र होगा.

लोकपाल तीन या अधिक सदस्यों की पीठ में कार्य करेगा. इस पीठ का गठन आक्रमिक तरीके से होगा और उन्हें मामले कम्प्यूटर के द्वारा आक्रमिक तरीके से सौंपे जाएंगे. प्रत्येक पीठ में कम से कम एक सदस्य विधिक पृष्ठभूमि वाला होगा.

इन पीठों का दायित्व होगा :
9. कुछ विशिष्ट श्रेणी के मामलों में अभियोजन आरम्भ करने की अनुमति देना
10. अपने कर्मचारियों के खिलाफ शिकायत सुनना
11. लोकपाल के अधिकारियों द्वारा जांच अथवा सतर्कता के बन्द कर दिए मामले या लोकपाल द्वारा समय-समय पर निर्धारित की गई श्रेणी के, मामलों में अपील
12. ऐसे अन्य आदेशों के लिए, जिनका निर्णय समय-समय पर लोकपाल द्वारा लिया जा सकता है.
परन्तु लोकपाल कि पूरी पीठ मापदण्ड बनाएगी कि किस तरह के मामले सदस्यों की पीठ देखेगी और कौन से मामलों का निर्णय मुख्य सतर्कता अधिकारी या सतर्कता अधिकारियों के स्तर पर होगा. ये मापदण्ड सरकार को हुए घाटे और/या जनता पर उसके असर और/या दोषी की स्थिति पर आधारित हो सकते हैं.
लोकपाल स्वत: जांच-पड़ताल करने का निर्णय ले सकता है.

कैबिनेट के किसी भी सदस्य के खिलाफ लोकपाल की पूरी पीठ जांच-पड़ताल या अभियोग शुरू कर सकती है.

इस अधिनियम के प्रावधान के अन्तर्गत कुछ मुद्दों पर लोकपाल की पूरी पीठ निर्णय लेगी. उस पीठ में कम से कम सात सदस्य होंगे.

लोकपाल की बैठक के कार्य विवरण और दस्तावेज सार्वजनिक होंगे.

15. लोकपाल के पास शिकायत दर्ज कराना:
इस अधिनियम के प्रावधानों के अधीन, कोई भी व्यक्ति लोकपाल को इस अधिनियम के तहत शिकायत दर्ज करा सकता हैं.
बशर्ते इस शिकायत के मामले में, यदि व्यक्ति मर चुका है या किसी भी कारण से वह खुद यह कार्य करने में असमर्थ है, तो यह उस व्यक्ति के वैधानिक प्रतिनिधि या उसके द्वारा लिखित रूप से अधिकृत किसी अन्य व्यक्ति द्वारा शिकायत दर्ज कराई जा सकती है और यदि शिकायत हो चुकी है तो लिखित तौर अधिकृत प्रतिनिधि के द्वारा शिकायत को जारी रखा जा सकता हैं.
यह भी कि नागरिक अपनी शिकायत देश में कहीं भी लोकपाल के किसी भी कार्यालय में दर्ज करा सकते हैं. लोकपाल कार्यालय का यह कर्र्तव्य होगा कि वह अपने तहत किसी युक्तियुक्त  लोकपाल अधिकारी को शिकायत पत्र हस्तान्तरित कर दे.
शिकायत किसी सादे कागज पर भी लिखकर दर्ज कराई जा सकती है परन्तु उसमें लोकपाल द्वारा निर्धारित सभी विवरण शामिल होने चाहिए.
(2क) अपनी वार्षिक रिपोर्ट संसद में प्रस्तुत करने के बाद, भारत के नियन्त्रक एवं महालेखा परीक्षक ऐसे सभी मामलों को लोकपाल को अग्रेशित करेंगे, जो इस अधिनियम के अन्तर्गत आरोप निर्धारित करते हैं और लोकपाल उन पर इस अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप ही कार्य करेगा.
शिकायत प्राप्त होने पर, लोकपाल यह फैसला करेगा कि यह आरोप है या शिकायत या भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले की सुरक्षा के लिए अनुरोध है या दोनों का मिश्रण है या इससे कुछ अधिक है.
लोकपाल को हर शिकायत अनिवार्य तौर पर निपटानी होगी.
परन्तु शिकायतकर्ता को सुनवाई का अवसर दिए बिना किसी शिकायत को बन्द नहीं किया जाएगा.

16. लोकपाल द्वारा जिन मामलों की जांच की जा सकती है- इस अधिनियम के प्रावधानों के अधीन लोकपाल किसी ऐसे कार्य की जांच कर सकता है जो किसी लोकसेवक के द्वारा किया गया हो, अथवा उसकी सामान्य या विशिष्ट स्वीकृति से किया गया हो, जिसकी शिकायत की रिपोर्ट की गई हो अथवा ऐसे कार्य के बारे में कोई आरोप लगाया गया हो.
परन्तु लोकपाल इस तरह के कार्य की स्वत: अथवा सरकार द्धारा कहे जाने पर भी जांच कर सकता है, यदि उसकी लिखित राय में ऐसे काम में कोई शिकायत या आरोप हो या होने की सम्भावना हो.

17. वे मामले जो जांच के दायरे से बाहर होंगे
लोकपाल, अधिनियम के अन्तर्गत निम्न कार्रवाई के सम्बन्ध में शिकायत के मामले में, कोई जांछ नहीं करेगा -
1. यदि शिकायतकर्ता के पास  किसी अन्य कानून द्वारा प्रदत्त किसी प्राधिकरण के सामने अपील, पुनरीक्षण, समीक्षा या किसी अन्य माध्यम से कोई निवारण है, या था और उसने उसका उपयोग नहीं किया है.
2. न्यायिक व अर्द्ध न्यायिक निकायों द्वारा लिए गए निर्णय जब तक कि शिकायतकर्ता दुर्भावनापूर्ण होने का आरोप न लगाए.
3. यदि पूरी शिकायत तात्विक रूप में किसी न्यायालय या सक्षम न्याय अधिकार क्षेत्र की अर्ध- न्याययिक संस्था के समक्ष लम्बित है
4. ऐसी कोई शिकायत जहां इ5. से निपटान करने में अत्यधिक एवं अबोध्य विलम्ब हो.
इस अधिनियम में ऐसा कुछ भी नहीं है कि लोकपाल संसद के किसी सदन के पीठासीन अधिकारी की स्वीकृति लेने के बाद ही किसी कार्रवाई की जांच करेगा.
इस अनुच्छेद की कोई बात लोकपाल को कदाचार या भ्रष्टाचार या भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले की सुरक्षा के खिलाफ शिकायत दर्ज करने से नहीं रोक सकती है.

18. शिकायत और जांच से सम्बन्धित प्रावधान-
क. लोकपाल, किसी शिकायत, आरोप के रूप में प्राप्त किसी शिकायत अथवा दोनों, या स्वत: संज्ञान से उठाए गए किसी मामले में, दस्तावेज़ों को देखते हुए, जांच या पूछताछ की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय ले सकता है, या जांच और पूछताछ की प्रक्रिया की सुनवाई के पहले प्रारम्भिक जांच का निर्णय ले सकता है या किसी दूसरे व्यक्ति को प्रारम्भिक जांच करने का निर्देश दे सकता है ताकि किसी जांच के लिए उचित आधार है या नहीं यह तय किया जा सकें. प्राथमिक जांच के परिणाम आते ही इसकी जानकारी, और यदि मामले को बन्द करने का निर्णय लिया जाता है तो जांच के दौरान एकत्र की गई समस्त सामग्री शिकायकर्ता को उपलब्ध कराई जाएगी.
साथ ही यह भी कि यदि, किसी मामले को बन्द किया जाता है तो उससे सम्बन्धित सभी दस्तावेज सार्वजिनक माने जाएंगे. हर महीने, बन्द किए गए ऐसे मामलों की सूची, मामले को बन्द किए जाने के कारण सहित,  वेबसाइट पर डाली जाएगी. इस तरह बन्द किए गए मामलों से सम्बन्धित सारी सामग्री सूचना के अधिकार के कानून के तहत, जानकारी मांगने वाले किसी भी व्यक्ति को, उपलब्ध कराई जाएगी
परन्तु साथ ही यह भी कि किसी भी शिकायत या आरोप को, शिकायतकर्ता के उद्देश्य अथवा प्रेरणा के आधार पर खारिज़ नहीं किया जा सकेगा.
साथ ही यह भी कि, लोकपाल के समक्ष की गई सभी सुनवाइयों की वीडियो रिकार्डिंग होगी और किसी भी व्यक्ति को, प्रतियां बनाने के मूल्य अदा करने पर, उपलब्ध कराई जाएगी.

20. किसी शिकायत की प्रारम्भिक जांच के लिए प्रक्रिया लोकपाल द्वारा मामले की परिस्थियों के आधार पर तय की जाएगी और यदि आवश्यक प्रतीत होता है तो लोकपाल सम्बन्धित लोक सेवक से टिप्पणी भी आमन्त्रित कर सकता है.
परन्तु यह भी कि, प्राथमिक जांच पूरी करने और मुकदमे को बन्द करने या जांच के लिए आगे बढ़ाने का निर्णय शिकायत प्राओत करने के एक माह के अन्दर और निश्चित तौर पर तीन माह के अन्दर ले लिया जाएगा. यदि एक महीने में जांच पूरी नहीं हो पाती वहां जांच पूरी होने पर विलम्ब का कारण लिखित तौर पर दर्ज कर के सार्वजनिक किया जाएगा.

21. इ22. स अधिनियम के तहत कोई भी शिकायत गुमनाम स्वीकार नहीं की जाएगी. शिकायतकर्ता  को लोकपाल के पास अपनी पहचान ज़ाहिर करनी होगी. तथापि यदि शिकायकर्ता चाहता है तो लोकपाल द्वारा उसकी पहचान गोपनीय रखी जाएगी.

(2) जहां लोकपाल सीधे सीधे या प्रारम्भिक जांच के बाद इस अधिनियम के अन्तर्गत जांच प्रस्तावित करता है, तो-
6. जरुरी समझने पर जांच से सम्बन्धित दस्तावेजों को सुरक्षित स्थान पर रखने का निर्देश दे सकता है.
7. जांच के उचित चरण पर या खत्म होने पर, जांच रिपोर्ट की प्रति, उसके निष्कर्ष एवं निष्कर्ष से सम्बन्धित आधार सामिग्री की प्रति सम्बन्धित लोक सेवक और शिकायतकर्ता को अग्रेशित की जाएगी.
8. सम्बन्धित लोक सेवक और शिकायतकर्ता को टिप्पणी और सुनवाई का मौका दिया जाएगा.
साथ ही यह भी कि अति विशिष्ट परिस्थितियों को छोड़ कर ऐसी सुनवाई सार्वजनिक रूप से की जाएगी, और उसे लिखित तौर पर रिकार्ड किया जाएगा, जहां यह सार्वजनिक हित में नहीं है, न्याय के हित के लिए इसे कैमरे में रिकार्ड कर सार्वजनिक किया जाएगा.
(3) इस अधिनियम के अन्तर्गत किसी कार्रवाई के सम्बन्ध में लोक सेवक के खिलाफ जांच करना उस कार्रवाई को, या जांच के अधीन किसी मामले के सम्बन्ध में आगे कोई कार्रवाई करने के लिए किसी अन्य लोक सेवक की शक्ति को प्रभावित नहीं करेगा.
यदि इस अधिनियम के तहत प्रारम्भिक जांच के दौरान, लोकपाल प्रथम दृष्टया सन्तुष्ट है कि आरोपों या शिकायतों के परिप्रेक्ष्य में पूरी या आंशिक तौर पर किसी भी तरह की कार्रवाई की सम्भावना है तो वह एक अन्तरिम आदेश के माध्यम से, लोक प्राधिकरण को निर्णय या कार्रवाई के क्रियान्वयन या अमलीकरण पर रोक लगाने की सिफारिश कर सकता है, या ऐसे नियम व शर्तों पर वह बाध्यकारी या निवारक कार्रवाई कर सकता है, जो और ज्यादा नुकसान से रोकने के वह अपने आदेश में उल्लेखित करे. लोक प्राधिकरण इस उप अनुच्छेद के अन्तर्गत आदेश प्राप्त करने के 15 दिन के अन्दर लोकपाल की सिफारिशों पर या तो अमल करेगा या उन्हें नामंजुर करेगा. लोकपाल यदि आवश्यक समझे तो, लोक प्राधिकरण को उपयुक्त निर्देश देने की मांग करते हुए सम्बन्धित उच्च न्यायालय में जा सकता है.
लोकपाल, यदि जांच के दौरान सन्तुष्ट होता है कि किसी मामले में अभियोग शुरू होने की सम्भावना है, या जांच की समाप्ति पर अभिय्ग शुरू करते समय, मामले में सभी आरोपियों की चल अचल सम्पित्ति की सूची बनाएगा और उसे अधिसूचित करेगा. अधिसूचना के पश्चात इस सम्पत्ति के हस्तान्तरण की अनुमति नहीं होगी. अन्तिम सजा की स्थिति में अदालत, अन्य उपायों के अलावा, इस अधिनियम की धारा 19 के अन्तर्गत, इस सम्पत्ति से भ्रष्टाचार के चलते हुई क्षति की वसूली कर सकता है.
यदि शिकायतों की जांच और पूछताछ के दौरान, लोकपाल को लगता है कि सरकारी सेवक के पद पर बने रहना जांच या पूछताछ को प्रतिकूल ढंग से प्रभावित कर सकता है या वह सरकारी सेवक सबूतों को नष्ट या छेड़छाड़ या गवाहों को प्रभावित कर सकता है, तो लोकपाल उस सरकारी सेवक के स्थानान्तरण या निलम्बन की उपयुक्त सिफारिश जारी कर सकता है. लोक प्राधिकरण लोकपाल द्वारा की गई सिफारिश के मिलने के 15 दिन के भीतर इसे उप धारा के अन्तर्गत इसे मान भी सकता है या मना कर सकता है. यदि लोकपाल इसे महत्वपूर्ण मानता है तो वह सम्बन्धित उच्च न्यायालय में जा सकता है और लोक प्राधिकरण के लिए उपयुक्त निर्देश की मांग कर सकता है.
लोकपाल, इस अधिनियम के अन्तर्गत पूछताछ अथवा जांच के किसी भी चरण में, अन्तरिम आदेश के ज़रिए, सक्षम प्राधिकारों को आवश्यक कार्रवाई करने, पूछताछ या जांच रोकने का निर्देश दे सकता है-
9. लोक सेवक के प्रशासनिक कार्य से सार्वजनिक राजस्व अपव्यय को रोकने या सार्वजनिक सम्पत्ति की क्षति के लिए
10. सरकारी सेवक के कार्यों में कदाचार को रोकने के लिए
11. सरकारी सेवक द्वारा भ्रष्ट तरीके से अर्जित सम्पत्ति को छिपाने से रोकने के लिए,
इस उप अनुच्छेद के अन्तर्गत लोक प्राधिकरण आदेश प्राप्त करने के 15 दिन के भीतर इस पर अमल करेगा अन्यथा नामंजूर करेगा. यदि लोकपाल इसे महत्वपूर्ण समझे तो वह सम्बन्धित उच्च न्यायालय में जा सकता है और लोक प्राधिकरण के लिए उपयुक्त निर्देश की मांग कर सकता है.
जहां, शिकायत पर जांच के बाद, लोकपाल यह पाता है कि, मन्त्रियों, संसद सदस्यों एवं न्यायधीशों के अतिरिक्त, किसी लोक सेवक के खिलाफ शिकायत में शामिल आरोप की पुष्टि होती है और सम्बन्धित लोक सेवक को अपने पद पर कायम नहीं रहना चाहिए तो वह इस हेतु आदेश जारी कर सकता है, यदि लोकसेवक मन्त्री है तो लोकपाल राष्ट्रपति को ऐसी शिकायत करेगा. राष्ट्रपति द्वारा सिफारिश प्राओत करने के एक माह के अन्दर, उसे स्वीकार करने या नामंजूर करने का निर्णय लिया जाएगा.
परन्तु यह भी कि इस अनुच्छेद के प्रावधान प्रधानमन्त्री पर लागू नहीं होंगे.
लोकपाल के सभी रिकार्ड और सूचनाएं सूचना का अधिकार कानून के तहत सार्वजनिक किए जाएंगे. और यहां तक कि जांच व पूछताछ की स्थिति भी, जब तक कि उस सूचना के जारी करने से किसी जांच व पूछताछ की प्रक्रिया पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़ता हो, उपलब्ध कराए जाएंगे.


भ्रष्टचार के चलते सरकार को होने वाले नुकसान की भरपाई और दण्ड

19. सरकार को होने वाले नुकसान की वसूली: भ्रष्टाचार निरोधक कानून 1988 की धारा 19 के तहत जब कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है, तब परीक्षण न्यायालय, सरकार को हुए नुकसान और दोषी द्वारा भ्रष्टाचार के माध्यम से अर्जित लाभ की गणना कर, इस तरह की कुल राशि को विभिन्न दोषियों के ऊपर आरोपित किया जाएगा और उनकी सम्पत्ति के ज़रिए वसूला जाएगा.

19क. अपराध के लिए सज़ा भ्रष्टाचार निरोधक कानून की उपधारा 2 (4) और उपधारा 28ए के अध्याय iii में विर्णत अपराध के लिए कम से कम एक वर्ष के सश्रम कारावास की सज़ा होगी और इसे उम्रकैद के तक भी बढ़ाया जा सकता है.
दोषी व्यक्ति के सरकार में उच्च पद पर आसीन होने की स्थिति में यह सज़ा और भी कठोर हो सकती है.
इसके अतिरिक्त, बशर्तें  कि, अपराध इस अधिनियम की उपधारा 2(4) के तहत विर्णत है और लाभार्थी एक व्यावसायिक इकाई है तो, इस अधिनियम में वर्णित एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अन्तर्गत अन्य सजा के अलावा जनता को हुए नुकसान का की पांच गुना राशि दोषी से जुर्माने के रूप में वसूली जाएगी,  अगर दोषी की सम्पत्ति अपर्याप्त है तो यह वसूली व्यावसायिक ईकाई और उसके निदेशकों की व्यक्तिगत सम्पत्ति से वसूली जा सकती है.

उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय के न्यायधीशों के खिलाफ शिकायतों का निपटान
19ख. हाईकोर्ट या सुप्रीमकोर्ट के जजों के खिलाफ शिकायतों की प्राप्ति व निपटाना:
हाईकोर्ट या सुप्रीमकोर्ट के जजों के खिलाफ किसी भी शिकायत को केवल लोकपाल अध्यक्ष ही देखे.
इस तरह की प्रत्येक शिकायत की प्रारम्भिक जांच होगी, जो प्रथम दृष्टया यह आकलन करेगी कि क्या भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत पर्याप्त सबूत हैं. यह जांच लोकपाल के किसी एक सदस्य द्वारा की जाएगी, जो लोकपाल की पूर्ण पीठ के समक्ष इसे प्रस्तुत करेगा. परन्तु यह पूर्ण पीठ, विधिक पृष्टभूमि के कम से कम तीन कानूनी सदस्यों की होगी.
कोई भी मामला विधिक पृष्ठभूमि के सदस्यों के बहुमत वाली पूर्ण पीठ के अनुमोदन के बगैर पंजीकृत नहीं किया जाएगा.
इस तरह के मामलों की जांच एक विशेष टीम द्वारा होगी, जिसका नेतृत्व कम से कम पुलिस अधीक्षक स्तर का अधिकारी करेगा.
अभियोजन आरम्भ करने अथवा न करने का निर्णय भी, लोकपाल की विधिक पृष्ठभूमि के सदस्यों के बहुमत वाली पूर्ण पीठ के द्वारा ही लिया जाएगा.


भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वालों का संरक्षण:

20. भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वालों का संरक्षण:
भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाला कोई व्यक्ति, यदि उसका व्यावसायिक या शारीरिक उत्पीड़न हो रहा हो या ऐसी धमकी दी गई हो तो   लोकपाल से सुरक्षा मांग सकता है,
इस तरह की कोई शिकायत मिलने पर लोकपाल निम्न कदम उठाएगा:
1. व्यावसायिक उत्पीड़न: उपयुक्त जांच के बाद अगर लोकपाल महसूस करता है कि इ2. स अधिनियम के तहत आरोप लगाने के बाद भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज वाले को वास्तव में खतरा है तो वह यथाशीघ्र , लेकिन शिकायत मिलने के एक माह से अधिक नहीं, सक्षम अधिकारी को लोकपाल के निर्देशानुसार आवश्यक कदम उठाने का आदेश देगा.
3. अगर भष्टाचार के विरूद्ध आवाज उठाने वाला शिकायत करता है कि इ4. स अधिनियम के तहत आरोप लगाने के बाद उसका व्यावसायिक उत्पीड़न हुआ है अथवा उसे पेशेगत रूप से नुकसान पहुंचाया गया है और जांच के बाद लोकपाल की यह राय बनती है कि सूचनादाता को वास्तव में नुकसान पहुंचाया गया है तो यथाशीघ्र, लेकिन शिकायत मिलने के एक माह से अधिक नहीं, युक्तियुक्त अधिकारी को लोकपाल के निर्देशानुसार आवश्यक कार्रवाई करने का आदेश देगा.
प्रावधान (क) के तहत लोकपाल धमकी देने वाले या नुकसान पहुंचाने वाले सरकारी अधिकारी के विरुद्ध सुसंगत नियमों के तहत उचित दण्ड का आदेश निर्गत कर सकता है लेकिन प्रावधान (ख) के तहत निश्चित रूप से ऐसा करेगा.
परन्तु प्रभावित सरकारी सेवक को अपना पक्ष रखने का एक अवसर उपलब्ध कराए बिना दंड़ का निर्धारण नहीं किया जा सकेगा.
5. शारीरिक नुकसान की धमकी: लोकपाल, युक्तियुक्त जांच कराएगा और अगर उसे लगे कि वास्तव में धमकी दी गई है और यह धमकी इ6. स अधिनियम के तहत आरोपण या सूचना के अधिकार के तहत आवेदन करने के वजह से दी गई है, तो किसी भी अन्य कानून के बावजूद लोकपाल अधिकतम एक सप्ताह के अन्दर उपयुक्त अधिकारी के साथ पुलिस को उक्त व्यक्ति को उचित सुरक्षा उपलब्ध कराने के साथ, धमकी देने वालों के विरुद्ध आपराधिक मुकदमा दर्ज कर आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश देगा.     
अगर धमकी गम्भीर एवं सिन्नकट है तो लोकपाल तत्काल कार्रवाई करते हुए, कुछ घण्टों के अन्दर उक्त व्यक्ति को शारीरिक हमले से बचाने का उपाय करेगा. अगर शिकायतकर्ता अध्यक्ष या किसी सदस्य से मिलना चाहता है तो वह उनसे फोन या वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बात करने या व्यक्तिगत रूप से मिलने के लिए अधिकृत होगा.  
23. यदि कोई व्यक्ति शिकायत करता है कि इ24. स अधिनियम के अन्तर्गत आरोप लगाने की वजह से उस पर शारीरिक हमला हुआ है और लोकपाल जांच के बाद इ25. स बात से आश्वस्त होता है कि उस व्यक्ति पर इ26. स अधिनियम के तहत आरोपण या सूचना के अधिकार के तहत आवेदन करने की वजह से हमला हुआ है, तो किसी भी अन्य कानून के बावजूद, लोकपाल ,यथाशीघ्र लेकिन अधिक से अधिक 24 घण्टे के अन्दर सम्बन्धित अधिकारियों को - उक्त व्यक्ति को उचित सुरक्षा उपलब्ध कराने, हमलावरों के विरुद्ध आपराधिक मुकदमा दर्ज कराने के साथ साथ यह भी सुनिश्चित करने कि उस व्यक्ति के साथ दोबारा इ27. स तरह की घटना न हो, के आदेश जारी करेगा. अगर शिकायतकर्ता अध्यक्ष या किसी सदस्य से मिलना चाहता है तो वह उनसे फोन या वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बात करने या व्यक्तिगत रूप से मिलने के लिए अधिकृत होगा.
(घ क) अगर भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाने वाला कोई व्यक्ति आरोप लगाता है कि इस अधिनियम के तहत आरोपण या सूचना के अधिकार अधिनियम के इस्तेमाल की वजह से उसके खिलाफ पुलिस या किसी प्राधिकारी ने मामला दर्ज कराया है या मामला दर्ज कराने का उपक्रम किया जा रहा है तो लोकपाल जांच के आधार पर उपयुक्त अधिकारियों को ऐसा मामला वापस लेने का आदेश निर्गत कर सकता है.
(घ ख) शारीरिक नुकसान की धमकी के मामले में या कोई ऐसा व्यक्ति जिस पर हमला हुआ है, देश में कहीं भी लोकपाल के कार्यालय में शिकायत कर सकता है और लोकपाल कार्यालय का यह कर्र्तव्य होगा कि वह उस शिकायत को तत्काल लोकपाल के उपयुक्त अधिकारी तक पहुंचा दे. 
(घ ग) लोकपाल भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाने वाले को सुरक्षा प्रदान करने का उत्तरदायित्व अपने अधीन किसी सतर्कता अधिकारी को सौंप सकता है और इस मामले में उस अधिकारी को यह अधिकार होगा कि वह उपयुक्त प्राधिकारी जिसमें पुलिस भी शामिल होगी, को उक्त भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाने वाले की सुरक्षा सुनिश्चित कराने के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दे सकता है.   
(घ घ) अगर लोकपाल के पास शिकायत के बाद किसी व्यक्ति पर हमला किया जाता है तो लोकपाल के सम्बन्धित अधिकारी को कर्र्तव्य का निर्वहन न कर पाने या मिलीभगत या दोनों का दोषी ठहराया जाएगा, जब तक वह इसकी पुष्टि नहीं कर देता कि उसने अपनी ओर से कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है.   
28. अगर भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाने वाला व्यक्ति भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दण्डनीय किसी कृत्या का आरोप लगाता है तो लोकपाल प्रावधान (ग) के मामले के तहत आरोपों की जांच के लिए एक विशेष दल का गठन कर सकता है जो प्राथमिकता के आधार पर एक महीने के भीतर मामले की जांच पूरा करेगा और प्रावधान (घ) के मामलों के तहत निश्चित रूप से ऐसा करेगा.
29. अगर भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाला कोई ऐसा आरोप लगाता है जो भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से अलग किसी अन्य कानून के तहत दण्डनीय है, तो प्रावधान (ग) के अधीन आने वाले मामले में लोकपाल उस ऐजेंसी, जिसके पास उस कानून को लागू करने का अधिकार है, को सूचनादाता के अरोपों की जांच के लिए विशेष दल बनाने और प्राथमिकता के आधार पर लोकपाल द्वारा निर्धारित समय सीमा के भीतर जांच पूरी करने का निर्देश दे सकता है और प्रावधान (घ) के अधीन आने वाले मामले में लोकपाल निश्चित रूप से ऐसा करेगा.
30. उपनियम (छ) के अधीन आने वाले मामलों में लोकपाल को उपयुक्त ऐजेंसी को इ31. स तरह की जांच की निगरानी करने और अगर जरूरी हुआ तो लोकपाल के निर्देश के अनुरूप ऐजेंसी को खुद जांच करने का निर्देश जारी करने का अधिकार होगा.
32. भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाने वाला, जिसे शारीरिक नुकसान पहुंचाने की धमकी दी गई है या उसे वास्तविक रूप से नुकसान पहुंचाया गया है, सीधे लोकपाल के अध्यक्ष से मिल सकता है और अध्यक्ष 24 घण्टे के भीतर उससे मिलेंगे और अधिनियम के प्रावधानों के मुताबिक उचित कर्रवाई करेंगे.
(3) अगर कोई शिकायतकर्ता अनुरोध करता है कि उसकी पहचान गुप्त रखी जाए तो लोकपाल ऐसा सुनिश्चित करेगा. लोकपाल इस बारे में विस्तृत प्रक्रिया निर्धारित करेगा कि इस तरह की शिकायतों को कैसे आगे बढ़ाया जाएगा.
(4) लोकपाल जुल्म की पुनरावृत्ति रोकने के लिए लोक प्राधिकारियों को नीतियों और प्रक्रिया में आवश्यक परिवर्तन का आदेश निर्गत करेगा.
(5) लोकपाल भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाने वालों से शिकायत की प्राप्ति और निपटान के लिए उपयुक्त नियम बनाएगा.

शिकायत निवारण प्रणाली

21. नागरिक घोषणापत्र:
प्रत्येक लोक प्राधिकरण इस अधिनियम के प्रभाव में आने के अधिकतम एक साल के भीतर नागरिक अधिकार पत्र की तैयारी और कार्यान्यवन सुनिश्चित करेगा.
प्रत्येक नागरिक घोषणापत्र में उस लोक प्राधिकरण की कार्य की प्रतिबद्धता के बारे में, प्रत्येक कार्य प्रतिबद्धता को सुनिश्चित करने के लिए ज़िम्मेदार अधिकारियों के बारे में और इसके लिए समय सीमा के बारे में स्पष्ट विवरण होगा.
प्रत्येक लोक प्राधिकरण एक प्राधिकारी नामित करेगा, जिसे लोक शिकायत निवारण अधिकारी कहा जाएगा, जिसके पास शिकायतकर्ता नागरिक घोषणापत्र के उल्लंघन की शिकायतें लेकर जाएंगे.
यह भी कि लोक प्राधिकरण ऐसी हर जगह पर, कम से कम एक लोक शिकायत निवारण अधिकारी नियुक्त करेगा जहां उसका कार्यालय होगा.
लोक शिकायत निवारण अधिकारी विभाग का प्रमुख होगा या उससे एक दर्जे नीचे का अधिकारी, लेकिन अगर किसी जगह विभाग प्रमुख नहीं है तो वहां के सबसे वरिष्ठ अधिकारी को लोक शिकायत निवारण अधिकारी नियुक्त किया जाएगा.
प्रत्येक लोक प्राधिकरण साल में कम से कम एक बार अपने मुख्य सतर्कता अधिकारी की मौजूदगी में सार्वजनिक बैठक कर नागरिक घोषणापत्र की समीक्षा कर और उसमें संशोधन करेगा.
लोकपाल किसी लोक प्राधिकरण को अपने नागरिक घोषणापत्र में परिवर्तन का आदेश निर्गत कर सकेगा और लोक प्राधिकरण को आदेश मिलने के एक सप्ताह के भीतर उक्त परिवर्तन करना होगा.   
प्रावधानों के मुताबिक इस तरह के परिवर्तन को लोकपाल की कम से कम तीन सदस्यीय पीठ द्वारा अनुमोदित कराना होगा.
इस तरह के परिवर्तन में नागरिक घोषणापत्र की मौजूदा समय सीमा बढ़नी या वर्णित कार्यों की संख्या घटनी नहीं चाहिए.

21क. शिकायत प्राप्ति व निपटान:

(1) किसी लोक प्राधिकरण का मुख्य सतर्कता अधिकारी उस लोक प्राधिकरण से सम्बन्धित शिकायतों को प्राप्त करने एवं निपटाने के लिए उतनी संख्या में सतर्कता अधिकारी घोषित करेगा जितना उचित लगे, जो कि अपीलीय शिकायत अधिकारी के तौर पर जाने जाएंगे।
(2) यदि कोई नागरिक जन शिकायत निवारण अधिकारी के समक्ष शिकायत करने के एक माह के अन्दर शिकायत का सन्तुष्टिपूर्ण निवारण प्राप्त करने में विफल रहता है तो, अपीलीय शिकायत अधिकारी के समक्ष शिकायत कर सकता है।
परन्तु शिकायत की गम्भीरता एवं तात्कालिकता पर विचार करते हुए अपीलीय शिकायत अधिकारी को यदि महसूस होता है कि, ऐसा करना जरूरी है तो, वह ऐसी शिकायत को जल्द भी स्वीकार करने का निर्णय कर सकता है।
(3) यदि शिकायत उस लोक प्राधिकरण के नागरिक चार्टर में विर्णत मुद्दे से सम्बन्धित नहीं है तो, अपीलीय शिकायत अधिकारी, शिकायत प्राप्त करने के एक माह के अन्दर, या तो शिकायत को नामंजूर करने या आदेश में विर्णत तरीके से उस समय के अन्दर शिकायत के समाधान के लिए लोक प्राधिकरण को निर्देश देते हुए एक आदेश जारी करेगा.
परन्तु यह भी कि शिकायतकर्ता को सुनवाई का अवसर दिये बगैर कोई शिकायत नामंजूर नहीं की जाएगी.
(4) अपीलीय शिकायत अधिकारी को प्रेषित शिकायत को सतर्कता दृष्टिकोण वाली शिकायत समझा जाएगा, यदि:

क. शिकायतकर्ता, सिटिज़न चार्टर में वर्णित मुद्दों के लिए, जन शिकायत निवारण अधिकारी से सन्तुष्टिपूर्ण निवारण पाने में विफल रहा है, अथवा, और
ख. सिटीज़न चार्टर में विर्णत मुद्दों से अतिरिक्त के लिए, यदि इस अनुच्छेद के उप-अनुच्छेद (3) में निर्धारित अपीलीय शिकायत अधिकारी के आदेश का उल्लंघन होता है।

(5) इस अनुच्छेद के उप-अनुच्छेद (4) में वर्णित, हरेक मामले को निम्न तरीके से समाधान किया जाएगा:

क. सुनवाई का वाजिब अवसर देने के बाद, अपीलीय शिकायत अधिकारी शिकायकर्ता की शिकायत को निर्धारित समय में सन्तुष्टिपूर्ण निवारण में विफलता के लिए जिम्मेदारी तय करते हुए आदेश जारी कर सकता है और उस लोक प्राधिकरण के आरेखण एवं संवितरण अधिकारी को आदेश में विर्णत तरीके से उस अधिकारी के वेतन से जुर्माने की रकम वसूलने का निर्देश दे सकता है, अपीलीय शिकायत अधिकारी के निर्देश अनुसार, वह जुर्माना सिटीज़न चार्टर में निदिर्ष्ट समय सीमा पूरा होने के दिन से या उस शिकायत के निवारण के लिए इस अनुच्छेद के उप-अनुच्छेद (3) के अन्तर्गत जारी आदेश में निदिर्ष्ट समय सीमा के दिन से गणना करके प्रतिदिन विलम्ब के लिए रुपये 250 से कम नहीं होना चाहिए।
ख.कथित अधिकारियों के वेतन से वसूली गई रकमों को शिकायतकर्ता को क्षतिपूर्ति के लिए आरेखण एवं संवितरण अधिकारी को निर्देश देना।

(6) इस अनुच्छेद के उप-अनुच्छेद (5) की उपधारा(क) के अन्तर्गत जारी किए जाने वाले आदेश में उल्लेखित अधिकारियों को स्पष्ट करना आवश्यक होगा कि उन्होंने नेकनीयती से कार्य किया है और उनका कोई भ्रष्ट उद्देश्य नहीं है। यदि वे ऐसा करने में विफल रहते हैं तो, अपीलीय शिकायत अधिकारी कथित अधिकारियों के खिलाफ केन्द्रीय नागरिक सेवा विनियम के अन्तर्गत जुर्माना लगाने की सिफारिश करेगा.  

21ख. वार्षिक अखण्डता लेखा परीक्षण : समय-समय पर लोकपाल की ओर से तय दिशानिर्देशों के अनुसार लोकपाल हरेक विभाग की वार्षिक अखण्डता लेखा परीक्षण करेगा।


बड़े या छोटे दण्ड का अधिरोपण

21ग. कदाचार के आरोप की शिकायतें सतर्कता अधिकारी के पास की जाएंगी. इन शिकायतों पर वही जांच भी करेगा.
21घ. अनुच्छेद 21क के अन्तर्गत सतर्कता दृष्टिकोण वाली कदाचार एवं जन शिकायतों के आरोप निम्न तरीके से हल किये जाएंगे:

सतर्कता अधिकारी ऐसे हरेक मामले में उसे प्राप्त करने के तीन माह के अन्दर जांच करेगा और मुख्य सतर्कता अधिकारी को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा।
रिपोर्ट प्राप्त करने के एक पखवाड़े के अन्दर, मुख्य सतर्कता अधिकारी उप मुख्य सतर्कता अधिकारियों का तीन सदस्यीय पीठ गठित करेगा, इस पीठ में उपधारा (1) के अन्दर जांच करने वाला अधिकारी ‘शामिल नहीं होगा.
यह पीठ जांच करने वाले सतर्कता अधिकारी, शिकायतकर्ता एवं आरोपी अधिकारी के साथ सारांश सुनवाई करेगी.
यह पीठ दैनिक आधार पर सुनवाई करेगी और आरोपी सरकारी सेवकों पर एक या अधिक छोटे और बड़े दण्ड लगाते हुए आदेश जारी करेगी.
परन्तु ये आदेश पीठ गठित करने के एक माह के अन्दर जारी किये जाएंगे।
साथ ही यह भी कि ऐसे आदेश समुचित निनियोक्ता प्राधिकरण को सिफारिश के स्वरूप में होंगे।
पीठ के आदेश के खिलाफ मुख्य सतर्कता अधिकारी के समक्ष अपील की जा सकेगी, जोकि आरोपी, शिकायतकर्ता एवं पूछताछ करने वाले सतर्कता अधिकारी को सुनवाई का वाजिब अवसर देने के बाद, अधिकतम एक माह के अन्दर अपना आदेश जारी करेगा.


लोकपाल में कर्मचारी और स्टाफ एवं अधिकारी

22. मुख्य सतर्कता अधिकारी:
प्रत्येक लोक प्राधिकरण में एक मुख्य सतर्कता अधिकारी होगा जिसका चयन और नियुक्ति लोकपाल द्वारा की जाएगी.
वह सम्बन्धित लोक प्राधिकरण से नहीं होगा.
वह एक ईमानदार निष्ठावान और भ्रष्टाचार के खिलाफ सक्रिय कार्रवाई करने में योग्य व्यक्ति होगा.
वह किसी भी लोक प्राधिकरण के खिलाफ शिकायत स्वीकार करने के लिए उतरादायी होगा और शिकायत प्राप्त होने के अधिकतम दो दिन के भीतर सम्बन्धित लोक अधिकारी के पास उसे स्थानान्तरित करेगा.
लोकपाल द्वारा समय-समय पर दिए गए दायित्वों के निर्वाह के लिए वह उत्तरदायी होगा, जिनमें,  लोकपाल द्वारा समय-समय पर निर्धारित किए गए तरीके से, शिकायतों का निपटान भी शामिल है.
परन्तु जिन शिकायतों के लिए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत जांच आवश्यक है, उन्हें लोकपाल के जांच सम्भाग को स्थानान्तरित किया जाएगा.
साथ ही यह भी कि, संयुक्त सचिव या उससे ऊपर स्तर के अधिकारियों के खिलाफ, काम पूरा न होने की शिकायतों के अतिरिक्त परिवादों को मुख्य सतर्कता अधिकारी नहीं देखेगा और उन्हें लोकपाल को स्थानान्तरित किया जाएगा, जो कि किन्ही तीन अन्य प्राधिकारणों के मुख्य सतर्कता अधिकारियों की एक कमेटी गठित करेगा जो इन शिकायतों की जांच करेगी.

अगर किसी नागरिक को जन शिकायत अधिकारी से इस अधिनियम की धारा 21 के तहत सन्तोषजनक निवारण नहीं मिलता है तो लोकपाल की ओर से मुख्य सतर्कता अधिकारी सभी शिकायतों को प्राप्त करेगा और उसका निपटान करेगा.
लोकपाल के निर्णय के अनुसार समय-समय पर कुछ सतर्कता अधिकारियों की नियुक्ति मुख्य सतर्कता अधिकारी के अधीन की जाएगी.
सतर्कता अधिकारियों एवं मुख्य सतर्कता अधिकारी को ऐसे मामलों में लोकपाल द्वारा केन्द्रीय नागरिक सेवा (आचरण) नियम के अन्तर्गत और समय समय पर लोकपाल द्वारा तय किये जाने वाले नियमों के मुताबिक पूछताछ करने एवं जुर्माना लगाने का अधिकार होगा।

23. लोकपाल के कर्मचारी इत्यादि
इस अधिनियम के अन्तर्गत ऐसे अधिकारी एवं कर्मचारी होंगे जो इस अधिनियम के अन्तर्गत लोकपाल को अपने कार्य को पूरा करने में मदद करने के लिए निर्धारित किये जा सकते हैं।
अधिकारियों एवं कर्मचारियों की संख्या एवं श्रेणी का निर्णय लोकपाल द्वारा किया जाएगा।
उप-अनुच्छेद (1) में वर्णित अधिकरियों, एवं कर्मचारियों की श्रेणियां, भर्ती एवं सेवा की शर्तें वे होंगी जो कि लोकपाल द्वारा निर्धारित की जा सकती हैं, इनमें विशेष शर्तें या विशेष वेतन शामिल हैं जो कि निडर होकर अपना कर्र्तव्य निभाने के लिए सक्षम बनाने के लिए जरूरी हो सकती हैं।
परन्तु यह कि जिस भी अधिकारी की निष्ठा सन्देहास्पद हो, उसे लोकपाल में नियुक्त करने के बारे में विचार नहीं किया जाएगा।
इसके अतिरिक्त यह भी कि सभी अधिकारी एवं कर्मचारी, जो कि लोकपाल में प्रतिनियुक्ति पर या किसी तरह से काम करते हैं, इस धारा के अन्तर्गत निर्धारित एकसमान नियमों एवं शर्तों के योग्य होंगे। 
उप-अनुच्छेद (1) के प्रावधानों के प्रति पूर्वाग्रह के बगैर, इस अधिनियम के अन्तर्गत जांच करने के उद्देश्य से लोकपाल निम्न की सेवाएं ले सकता है -
1. केन्द्र सरकार के किसी अधिकारी या जांच एजेंसी; या
2. किसी अन्य सरकार की पूर्व सहमति से उनका कोई अधिकारी या जांच एजेंसी; या
3. निजी व्यक्ति सहित, कोई व्यक्ति, या कोई अन्य एजेंसी।

इस उप-अनुच्छेद में जिक्र किये गये अधिकारी एवं कर्मचारी लोकपाल के प्रशासनिक एवं अनुशासनिक नियन्त्रण में होंगे।
लोकपाल को अपने अधिकारी चुनने की शक्ति होगी। लोकपाल सरकारी एजेंसियों से तय समय के लिए प्रतिनियुक्ति पर अधिकारी प्राप्त कर सकता है या अन्य सरकारी एजेंसियों से स्थायी आधार पर अधिकारी प्राप्त कर सकता है या स्थायी आधार पर नियत समय के लिए बाहर से व्यक्ति नियुक्त कर सकता है।
कर्मचारी एवं अधिकारी ऐसे वेतनमान एवं भत्ते के हकदार होंगे, जो कि केन्द्र सरकार के साधारण वेतनमान से अलग एवं ज्यादा हो सकता है, जो कि समय समय पर लोकपाल द्वारा प्रधानमन्त्री के साथ विचार-विमर्श से तय किया जाएगा, ताकि लोकपाल में काम करने के लिए ईमानदार एवं सक्षम लोग आकर्षित हों।
लोकपाल अपने सम्पूर्ण बजटीय बाधाओं के अन्तर्गत, अपने काम के बोझ के अनुसार एवं कार्यरत स्टाफों के सेवा की शर्तों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न स्तरों पर अपने कर्मचारी कम करने या बढ़ाने के लिए सक्षम होगा।

24. निरस्त व बचाव करना-
(1) केन्द्रीय सर्तकता आयोग अधिनियम निष्प्रभावी हो जाएगा.
(2) निरस्त होने के बावजूद, इस अधिनियम के अन्तर्गत हुए कोई कार्य या चीज इस अधिनियम के अन्तर्गत की हुई समझी जाएंगी और इस अधिनियम के समतुल्य प्रावधानों के अन्तर्गत जारी और पूरी की जा सकती है।
(3) केन्द्रीय सतर्कता आयोग के समक्ष लंबित सभी पूछताछ एवं जांच और अन्य अनुशासनात्मक कार्यवाही और जिनका निपटारा नहीं हुआ है, वे लोकपाल को हस्तान्तरित की जाएंगी और जारी रहेंगी यदि वे इस अधिनियम के अंतर्गत उनके समक्ष शुरू होती हैं।
(4) किसी अधिनियम में कुछ व्यवस्था भी होने के बावजूद, केन्द्रीय सतर्कता आयोग के सचिव एवं अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों का पद समाप्त किया जाता है और इसके बाद वे लोकपाल के सचिव एवं अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों के तौर पर नियुक्त किये जाते हैं। उस सचिव, अधिकारियों एवं अन्य कर्मचारियों के वेतन, भत्ते एवं सेवा की अन्य नियम व शर्तें, जब तक कि उन्हें बदला न जाए, वहीं होंगी जो इस अधिनियम में शुरू करने के ठीक पहले वे हकदार रहे हैं।
(5) केन्द्र सरकार के सभी विभागों, केन्द्र सरकार के मन्त्रालयों, किसी केन्द्रीय अधिनियम के अन्तर्गत स्थापित निगम, सरकारी कम्पनियां, केन्द्र सरकार की या उनके द्वारा नियन्त्रित सोसायटी एवं स्थानीय प्राधिकरण के नियन्त्रण के अन्तर्गत सभी सतर्कता प्रशासन, सभी उद्देश्यों के लिए अपने अधिकारियों, सम्पत्तियों एवं दायित्त्वों सहित लोकपाल को हस्तान्तरित हो जाएंगे।
(6) उप-अनुच्छेद (5) में विर्णत एजेंसियों की सतर्कता शाखा में कार्यरत अधिकारी लोकपाल में स्थानान्तरित किये जाने वाले तारीख से पांच साल के लिए प्रतिनियुक्ति पर समझे जाएंगे। जबकि, लोकपाल उनमें से किसी को भी व कभी भी उनकी वापसी कर सकता है।
(7) उप-अनुच्छेद (5) के अन्तर्गत लोकपाल को स्थानान्तरित हुए अधिकारियों के विभाग का स्थानान्तरित अधिकारियों के प्रशासन एवं कार्य पर कोई भी नियन्त्रण बन्द हो जाएगा।
(8) लोकपाल अधिकारियों को एक के बाद बदलते रहेंगे और और हरेक विभाग का सतर्कता शाखा इस तरह बनाएंगे कि उसी विभाग का कोई अधिकारी उसी विभाग के सतर्कता कार्य के लिए नियुक्त न हो।
(9) वह व्यक्ति लोकपाल के साथ नियुक्त नहीं होगा जिन पर विचार करते समय उनके खिलाफ कोई भी सतर्कता पूछताछ या आपराधिक मामला लंबित या विचाराधीन हो।

25. लोकपाल की अन्वेषण शाखा-
लोकपाल में एक अन्वेषण शाखा होगी.
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के धारा 17 के प्रावधानों के बावजूद लोकपाल के स्तर निर्धारित किए गए अन्वेषण शाखा के ऐसे अधिकारी इस अधिनियम के अधीन शिकायतों के जांच के सिलसिले में पूरे देश में किसी व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकते हैं. उन्हें वे सभी अधिकार, कर्र्तव्य, विशेषाधिकार और दायित्व हासिल होंगे जो किसी घटना की जांच के लिए दिल्ली विशेष  पुलिस स्थापना के सदस्यों को मिले हुए हैं.
दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना को का वह भाग जो भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत सम्बन्धित अपराधों के अन्वेषण और अभियोजन के लिए प्रतिबद्ध होता है, अपने कर्मचारियों, साधनों और देनदारियों समेत सभी प्रयोजनों  के लिए लोकपाल को हस्तान्तरित कर दिया जाएगा.
उप-धारा (3) के तहत स्थानान्तरित किया गया दिल्ली विशेष पुलिस विभाग, लोकपाल के सतर्कता विभाग का हिस्सा होगा.
केन्द्रीय सरकार का उस स्थानान्तरित प्रभाग व उनके कर्मचारियों पर कोई अधिकार नहीं होगा.
स्थानान्तरित कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और सेवा की अन्य नियम व शर्तें उप धारा (3) के तहत वहीं होंगी, जिनके वे इस अधिनियम के प्रारम्भ होने से तुरन्त पहले योग्य थे.
वे सभी मामले जो कि दिल्ली विशेष पुलिस प्रभाग के पास थे, वे सभी उप धारा (3) के तहत लोकपाल को स्थानान्तरित हो जाएंगे.
किसी मामले की जांच के पूरा होने के बाद, उस मामले को अन्वेषण शाखा लोकपाल की उपयुक्त पीठ के सामने प्रस्तुत करेगी ताकि यह निर्णय लिया जा सके कि उस पर अभियोजन करने की इजाजत है या नहीं.   

25क. अभियोजन शाखा-  लोकपाल की एक अभियोजन शाखा होगी. किसी मामले में जांच पूरी होने के बाद, जांच शाखा इसे अभियोजन शाखा को अग्रसित कर देगी, जिस पर अभियोजन करने या नहीं करने का निर्णय अभियोजन शाखा लेगी.
परन्तु यह कि लोकपाल द्वारा चिन्हित विशिष्ट श्रेणी के मामलों में लोकपाल की पीठ द्वारा यह निर्णय लिया जाएगा कि इसके अभियोजन की अनुमति देनी है या इंकार करना है.
यह भी कि जांच शाखा से मामला मिलने के दो सप्ताह के भीतर अभियोजन शाखा अभियोजन की अनुमति देने या नहीं देने का निर्णय लेगी, ऐसा नहीं होने की स्थिति में मान लिया जाएगा कि अभियोजन शाखा अभियोजन शुरू करने जा रही है.

26. लोकपाल के अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ शिकायत:

(1) लोकपाल के अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ की गई शिकायत की जांच, इस उपखंड के प्रावधानों के अनुसार , अलग से की जाएगी.
(2) ऐसी शिकायत अपराध के रूप में आरोपित, अथवा भ्रष्टाचार अधिनियम के अनुसार या दुराचार या बेईमानी के मामले की हो सकती है.
(3) लोकपाल में जैसे ही शिकायत दर्ज की जाएगी, शिकायत की सामग्री सहित लोकपाल की वेबसाइट पर प्रदर्शित किया जाएगा,
परन्तु शिकायतकर्ता अगर चाहेगा तो उसकी पहचान नहीं बताई जाएगी.
(4) हर शिकायत की जांच, उसके मिलने के एक माह के भीतर पूरी कर ली जाएगी.
(5) किसी अधिकारी पर लगे आरोपों की जांच भारतीय दण्ड संहिता की धारा 107, 166, 167, 177, 182, 191, 199, 200, 201, 204, 217, 218, 219, 463, 464, 468, 469, 470, 471, 474 के तहत की जाएगी. 
(6) अगर जांच के दौरान ऐसा लगा कि लगाए गए आरोप सही हैं तो उस अधिकारी से सारे अधिकार और दायित्व छीन लिए जाएंगे और उसे निलम्बित कर दिया जाएगा.
(7) यदि पूछताछ या जांच पूरी होने के बाद, उस व्यक्ति पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम-1988 के अन्तर्गत अभियोग चलाने का निर्णय लिया जाता है या वह किसी दुर्व्यवहार अथवा गलत तरीके से पूछताछ या जांच करने का दोषी पाया जाता है तो, वह व्यक्ति आगे से लोकपाल के साथ काम नहीं करेगा। यदि वह व्यक्ति लोकपाल में नौकरी पर है तो लोकपाल उस व्यक्ति को नौकरी से निकाल देगा, या यदि वह प्रतिनियुक्ति पर है तो, उसे नौकरी से निकालने की सिफारिश के साथ वापस भेज दिया जाएगा।
परन्तु इस अनुच्छेद के अन्तर्गत आरोपी व्यक्ति का पक्ष सुनने का वाजिब अवसर दिये बगैर कोई आदेश जारी नहीं किया जाएगा।
परन्तु इस अनुच्छेद के अन्तर्गत जांच पूरी करने के लिए 15 दिनों के अन्दर वह आदेश जारी कर दिया जाएगा।
(8) अपने स्टाफ एवं कर्मचारियों के खिलाफ शिकायतों के मामले के सुनवाई तीन सदस्यीय न्यायपीठ करेगी। जबकि, मुख्य सतर्कता अधिकारी या उससे ऊपर के स्तर के अधिकारियों के लिए, लोकपाल की पूर्ण पीठ द्वारा सुनवाई की जाएगी।
(9) लोकपाल यह सुनिश्चित करने के लिए सारे कदम उठायेगा ताकि उसके अपने स्टाफ एवं कर्मचारियों के खिलाफ शिकायतों पर सभी पूछताछ एवं जांच अति पारदर्शी एवं ईमानदारी पूर्ण तरीके से की जाए।

27. बचाव:

(1)  किसी अध्यक्ष या सदस्य या किसी अधिकारी के खिलाफ, कर्मचारी, एजेंसी, या व्यक्ति जो अपनी ड्यूटी करते समय अपना दायित्व नेकनीयती से निभाता है तो उसके खिलाफ इस निदिर्ष्ट धारा 14( 4) के तहत गलत आरोप लगाने पर कोई मुकदमा, अभियोग या अन्य कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी. 
विविध

28. सार्वजनिक अधिकारी अपनी सम्पत्ति का ब्यौरा प्रस्तुत करें:
अनुच्छेद 2(12) (क) से (ग) में विर्णत के अलावा, प्रत्येक लोक सेवक इस अधिनियम के शुरू होने के तीन माह के अन्दर और उसके बाद हर साल 30 जून के पहले, लोकपाल द्वारा निर्धारित स्वरूप में, अपने लोक प्राधिकरण के प्रमुख को, अपनी एवं जो अपने परिवार के सदस्यों की सम्पत्तियों एवं जिम्मेदारियों का ब्यौरा प्रस्तुत करेगा। अनुच्छेद 2(12) (क) से (ग) में विर्णत लोकसेवक, लोकपाल को उपरोक्त समय अवधि में, लोकपाल द्वारा निर्धारित स्वरूप में रिटर्न प्रस्तुत करेगा, जिसमें उसकी आय के स्रोत भी शामिल होंगे।
हरेक लोक प्राधिकरण का प्रमुख यह सुनिश्चित करेगा कि ऐसे सभी ब्यौरे उस वर्ष के 31 अगस्त तक वेबसाइट पर डाल दिये जाएं।
यदि उस लोक प्राधिकरण के प्रमुख को उप-अनुच्छेद (1) में निर्धारित समय में किसी लोक सेवक से ऐसा ब्यौरा प्राप्त नहीं होता है तो, उस लोक प्राधिकरण का प्रमुख सम्बन्धित लोक सेवक को ऐसा तत्काल करने का निर्देश देगा। यदि अगले एक माह में, सम्बन्धित लोक सेवक ऐसा ब्यौरा प्रस्तुत नहीं करता है तो, प्रमुख उस लोक सेवक द्वारा वह ब्यौरा प्रस्तुत करने तक उसका वेतन एवं भत्ता रोक देगा.
स्पष्टीकरण - इस अनुच्छेद में ``लोक सेवक का परिवार´´ का मतलब पत्नी एवं उसके बच्चे और लोक सेवक के माता पिता, जो उन पर आश्रित हों।
लोकपाल उस लोक सेवक के खिलाफ भारतीय दण्ड संहिता की धारा 176 के अन्तर्गत अभियोग शुरू कर सकता है।

28क. सम्पत्तियों को भ्रष्ट तरीकों से प्राप्त किया गया समझा जाएगा:
(1) किसी लोक सेवक या उसके परिवार के किसी सदस्य के स्वामित्व में ऐसी कोई चल या अचल सम्पत्ति पायी जाती है, जिसे उस लोक सेवक द्वारा इस अनुच्छेद के अन्तर्गत घोषित नहीं की गई थी जो कि इस अनुच्छेद के अन्तर्गत पिछली रिटर्न दाखिल करने से पहले हासिल की गई हैं, तो उसे भ्रष्ट तरीके से अर्जित किया गया समझा जाएगा।
(2) किसी लोक सेवक या उसके परिवार के किसी सदस्य के कब्जे में ऐसी कोई चल या अचल सम्पत्ति पायी जाती है, जो कि इस अनुच्छेद के अन्तर्गत उस लोक सेवक द्वारा घोषित नहीं की गई थी, वह उस लोक सेवक के स्वामित्व में माना जाएगा एवं वह लोक सेवक द्वारा भ्रष्ट तरीके के माध्यम से हासिल किया हुआ समझा जाएगा, उसे अन्यथा साबित करने का दायित्व लोक सेवक का होगा।
(3) किसी लोक सेवक को 15 दिनों के अन्दर इस बात का स्पष्टीकरण देने का एक अवसर दिया जाएगा, कि –
1. इ2. स अनुच्छेद के उप-अनुच्छेद (1) के अन्तर्गत सम्पत्ति होने की स्थिति में, क्या उसने किसी भी पिछले सालों में उस सम्पत्ति को घोषित किया था।
3. इ4. स अनुच्छेद के उप-अनुच्छेद (2) के अन्तर्गत सम्पत्ति होने की स्थिति में, स्पष्टीकरण देने के लिए कि उसे लोक सेवक के स्वामित्व में क्यों नहीं समझा जाना चाहिए।

(4) यदि लोक सेवक इस अनुच्छेद के उप-अनुच्छेद (3) के अन्तर्गत सन्तुष्टिपूर्ण जवाब प्रदान करने में विफल रहता है तो, लोकपाल ऐसी सभी सम्पत्तियों को जब्त कर लेगा।
(5) इस अनुच्छेद के उप-अनुच्छेद (3) के अन्तर्गत जिसके लिए नोटिस जारी की जाती है, उन सम्पत्तियों का हस्तान्तरण नोटिस जारी करने की तिथि के बाद अमान्य समझी जाएंगी।
(6) लोकपाल, उचित कार्रवाई के लिए ऐसी जानकारी आय कर विभाग को सूचित करेगा.
(7) लोकपाल के उस आदेश के खिलाफ अपील उपयुक्त अधिकार क्षेत्र के उच्च न्यायालय में किया जाएगा, जो अपील दाखिल करने के तीन माह के अन्दर मामले का निर्णय करेगा-
परन्तु, उप-अनुच्छेद (4) के अन्तर्गत लोकपाल के आदेश के 30 दिन बीत जाने के बाद किसी अपील पर विचार नहीं किया जाएगा.
(8) इस अनुच्छेद के अन्तर्गत जब्त समस्त सम्पत्तियों को नीलामी में सबसे ज्यादा बोली लगाने वाले को दी जाएगी। उसकी आधी आय को लोकपाल द्वारा भारत के समेकित कोष में जमा किया जाएगा। शेष रकम को लोकपाल द्वारा अपने खुद के प्रशासन के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है.
परन्तु यदि किसी मामले में अपील दाखिल की गई है तो अपील के निपटारे तक कोई नीलामी नहीं होगी.

28ख (1) संसद के किसी चुनाव के पूरा होने के तीन माह के बाद, लोकपाल उम्मीदवार द्वारा भारत के चुनाव आयोग के पास प्रस्तुत सम्पत्ति के ब्यौरे की तुलना आयकर विभाग के उपलब्ध उसके आय के स्रोत से करेगा। जिन मामलों ज्ञात स्रोतों से ज्यादा सम्पत्ति पायी जाती है, वह उपयुक्त कार्यवाही शुरू करेगा।
(2) किसी संसद सदस्य के खिलाफ यह आरोप लगता है कि उसने संसद में मतदान करने या संसद में सवाल उठाने या अन्य किसी विषय सहित संसद के किसी व्यवस्था में रिश्वत ली है तो, संसद सदस्य जिस सदन का सदस्य है तदानुसार, लोकसभा स्पीकर या राज्य सभा अध्यक्ष के पास शिकायत की जा सकती है. ऐसी शिकायतों पर निम्न तरीके से सुनवाई होगी:
1. शिकायत प्राप्त होने के एक माह के अन्दर उसे आचारनीति समिति के पास आगे भेजा जाएगा।
2. आचारनीति समिति एक माह के अन्दर निर्णय करेगी कि उस पर क्या किया जाना है।

29 प्रतिनिधियों को कार्यभार सौंपने की शक्ति: 
लोकपाल अपने मातहतों को शक्तियां और कार्य सौंपने का अधिकारी होगा.
ऐसे अधिकारियों की ओर से अपनी शक्तियों का प्रयोग कर जो कार्य किए जाएगा, उसे लोकपाल द्वारा किया माना जाएगा.
परन्तु नीचे लिखे गए कार्य पीठ द्वारा ही पूरे किए जाएंगे और इन्हें किसी और पर प्रत्यायोजित नहीं किया जाएगा.
1. किसी मामले में अभियोजन शुरू करने का आदेश देना.
2. सीसीएस संचालित नियमों के अनुसार किसी सरकारी कर्मचारी को बर्खास्त करना.
3. अनुभाग 10 के अन्तर्गत लोकपाल के अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ शिकायत पर आदेश जारी करना.
4. संयुक्त सचिव और उससे ऊपर के अधिकारियों के खिलाफ मामलों की शिकायतों पर आदेश जारी करना.

30. समय सीमा:
अनुभाग 9 के उपभाग (1) के अंर्तगत इस अधिनियम में प्रारम्भिक जांच शिकायत प्राप्त होने के एक महीने में पूरी हो जानी चाहिए.
परन्तु अगर जांच निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी नहीं होती है, तो जांच अधिकारी को इसका कारण बताने के लिए ज़िम्मेदार माना जाएगा.
किसी आरोप की जांच शिकायत मिलने से छह महीने और किसी भी परिस्थिति में एक वर्ष के भीतर पूरी की जाएगी .
लोकपाल की ओर से दायर अभियोजन पर सुनवाई एक वर्ष के भीतर पूरी हो जानी चाहिए. स्थगन अति विशिष्ट परिस्थितियों में ही दिए जाने चाहिए.
30क. पारदर्शिता और सूचना के अधिकार के लिए प्रार्थना पत्र: 
लोकपाल हर सूचना को वेबसाइट पर मुहैया कराने का हर सम्भव प्रयास करेगा.
किसी मामले की जांच पूरी हो जाने के बाद, उससे जुड़े सभी दस्तावेज आम जनता के लिए उपलब्ध होंगे. लोकपाल को यह दस्तावेज वेबसाइट पर डालने का यथासम्भव प्रयास करना होगा.
परन्तु, जानकारी देते समय इस तथ्य का ध्यान रखा जाए कि जिस व्यक्ति ने अपनी पहचान छुपाने की बात कही है और कोई ऐसी सूचना जिससे देश की आन्तरिक और बाह्य सुरक्षा को खतरा हो, को प्रकट नहीं किया जाएगा.

31. विशिष्ट शिकायतों पर जुर्माना:
इस अधिनियम में उल्लेखित होने के बावजूद, यदि कोई व्यक्ति इस अधिनियम के अन्तर्गत कोई ऐसी शिकायत करता है, जिसमें कोई आधार या साक्ष्य का अभाव हो और वह किसी प्राधिकारों को तंग करने के लिए लोकपाल को की गई हो, तो, लोकपाल शिकायतकर्ता पर जो उचित समझे वह जुर्माना लगा सकता है, लेकिन किसी एक मामले में कुल जुर्माना रुपये एक लाख से ज्यादा नहीं होगा।
परन्तु सुनवाई का वाजिब अवसर दिये बगैर कोई जुर्माना नहीं लगाया जा सकता।
इसके साथ ही यह भी कि सिर्फ इसलिए कि इस अधिनियम के अन्तर्गत जांच के बाद मामला साबित नहीं हो पाया हो, तो इस अनुच्छेद के उद्देश्य के लिए शिकायतकर्ता के खिलाफ ऐसा नहीं किया जाएगा.
वह जुर्माना भूमि राजस्व अधिनियम के अन्तर्गत बकाया अनुसार वसूले जा सकने योग्य होगा.
इस अधिनियम के अन्तर्गत एक बार जो शिकायत या आरोप कर दी गई हो उसे वापस लेने की अनुमति नहीं होगी.

31क. निवारक उपाय:
लोकपाल, नियमित समय अन्तराल पर, अपने अधिकार क्षेत्र में पड़ने वाले सभी लोक प्राधिकरण के कार्य पद्धति का या तो स्वयं अथवा किसी अन्य के माध्यम से अध्ययन करेगा और सम्बन्धित लोक प्राधिकरण से विचार-विमर्श करके, ऐसे निर्देश जारी करेगा जिसे वह भविष्य में भ्रष्टाचार की घटनाओं को रोकने के लिए उचित समझे।
लोकपाल इस अधिनियम के बारे जागरूकता उत्पन्न करने एवं आम जनता को भ्रष्टाचार रोकने में शामिल करने के लिए भी उत्तरदायी होगा।

31ख. पुरस्योजना:
लोकपाल को सरकार के भीतर और बाहर भ्रष्टाचार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने वाले व्यक्तियों को पुरस्कृत कर, आम जनता को प्रोत्साहित करना चाहिए.
लोकपाल को इस तरह की योजना लागू करने के लिए भी तैयार रहना चाहिए जिसमें शिकायतकर्ता को आर्थिक तौर पर भी पुरस्कृत किया जा सके. लेकिन, यह पुरस्कार राशि भ्रष्टाचार से होने वाले नुकसान की 10 फीसदी से अधिक नहीं होनी चाहिए.

32. कानून बनाने का अधिकार:

सरकार अधिकारिक गजट में अधिसूचना के द्वारा इस अधिनियम के प्रावधानों को प्रभाव में लाने के उद्देश्य से नियम बनाएगी।
परन्तु ऐसे नियम केवल लोकपाल से विचार-विमर्श करके ही बनाये जाएंगे।
खासकर, एवं पूर्वगामी प्रावधानों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बगैर, ऐसे नियम निम्न प्रदान कर सकते हैं :
1. लोकपाल के अध्यक्ष और सदस्यों को देय भत्ते, पेंशन और अन्य सेवा शर्तों के संबंध में;
2. अनुभाग 11 के उपभाग (2) के खण्ड (एच) के अन्तर्गत लोकपाल के पास एक सिविल अदालत की शक्तियां प्राप्त होनीं चाहिए.
(2क) लोकपाल को सुचारू रूप से चलाने के लिए लोकपाल को अपने नियम बनाने की छूट होनी चाहिए.
लोकपाल के स्टाफ और कर्मचारियों आदि के वेतन, भत्ते, भर्ती और अन्य सेवाओं के बारे में;
लोकपाल में मामले दर्ज कराने और कार्यवाही शुरू करने की प्रक्रिया.
इसके साथ ही कोई अन्य विषय, जिसमें इस अधिनियम के अंर्तगत कानून बनाना जरूरी हो.
इस अधिनियम के अन्तर्गत बने किसी नियम को पूर्वव्यापी प्रभाव के साथ बनाया जा सकता है और जब ऐसा नियम बनाया जाता है तो संसद के दोनों सदनो के समक्ष वक्तव्य में नियम बनाने की वजह को स्पष्ट किया जाएगा.
लोकपाल इस अधिनियम में विभिन्न प्रावधानों में वर्णित समय सीमा का कड़ाई से पालन करेगा. इसे हासिल करने के लिए, लोकपाल हरेक स्तर के पदाधिकारी के लिए मानक तय करेगा और कार्य के बोझ के अनुसार अतिरिक्त संख्या में पदाधिकारियों एवं बजट की जरूरत का आकलन करेगा.

32क. यह लोकपाल का कर्र्तव्य होगा कि अपने स्टाफ को नियमित अन्तराल में प्रशिक्षित करे और उनके कौशल में सुधार के लिए अन्य सभी कदम उठाये और लोगों के साथ व्यवहार करने के सोच में बदलाव लाए।
लोकपाल को हर स्पर होने वाले कार्य के मानदण्डों को सूचीबद्ध करना होगा. इसके बाद कार्य की मात्रा को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त लोगों की भर्ती की जरूरत और बजट का हिसाब लगाना होगा.

33. कठिनाइयों को दूर करना :- इस अधिनियम में कुछ भी होने के बावजूद, राष्ट्रपति, लोकपाल के साथ विचार-विमर्श करके या लोकपाल के निवेदन पर निम्न आदेश, ऐसे प्रावधान कर सकता है-
(1) इ(2) स अधिनियम के प्रावधानों को प्रभावी संचालन में लाने के लिए
(3) केन्द्रीय सतर्कता आयोग के समक्ष लंबित पूछताछ एवं जांच को लोकपाल द्वारा जारी रखने के लिए।

34 . कानून बनाने की शक्ति :- संस्था के अबाध क्रियाकलाप एवं इस अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए लोकपाल को अपने विनियम बनाने का अधिकार होगा।

35. यह अधिनियम अन्य सभी कानूनों के प्रावधानों से सर्वोपरि होगा। 


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JANLOKPAL BILL

The following Bill has been drafted only for setting up an institution of Lokpal at the centre. We
propose that in this same Bill, provisions on the same model may be made for setting up similar
institution of Lokayukta in each state.
Jan Lokpal Bill version 2.2
An act to create effective anti-corruption and grievance redressal systems at centre so that effective
deterrent is created against corruption and to provide effective protection to whistleblowers.
1. Short title and commencement:- (1) This Act may be called the Jan Lokpal Act, 2010.
(2) It shall come into force on the one hundred and twentieth day of its enactment.
2. Definitions:- In this Act, unless the context otherwise requires,-
1.
(1) “Action” means any action taken by a public servant in the discharge of his functions as
such public servant and includes decision, recommendation or finding or in any other
manner and includes willful failure or omission to act and all other expressions relating to
such action shall be construed accordingly;
(2) “Allegation” in relation to a public servant includes any affirmation that such public servant-
(a) has indulged in misconduct, if he is a government servant;
(b) has indulged in corruption
(3) “complaint” includes any grievance or allegation or a request by whistleblower for protection and
appropriate action.
(4) “corruption” includes anything made punishable under Chapter IX of the Indian Penal Code or
under the Prevention of Corruption Act, 1988;
Provided that if any person obtains any benefit from the government by violating any laws or
rules, that person along with the public servants who directly or indirectly helped that person
obtain those benefits, shall be deemed to have indulged in corruption.
(5) “Government” or “Central Government” means Government of India.
(6) “Government Servant” means any person who is or was any time appointed to a civil service
or post in connection with the affairs of the Central Government or High Courts or Supreme
Court either on deputation or permanent or temporary or on contractual employment but
would not include the judges.
(7) “grievance” means a claim by a person that he could not get satisfactory redressal according
to citizen’s charter and despite approaching Public Grievance Officer of that Department;
(8) “Lokpal” means
a. Benches constituted under this Act and performing their functions as laid down under
various provisions of this Act; or
b. Any officer or employee, exercising its powers and carrying out its functions and
responsibilities, in the manner and to the extent, assigned to it under this Act, or under
various rules, regulations or orders made under various provisions of this Act.
c. For all other purposes, the Chairperson and members acting collectively as a body;
(8A) “Minor penalty” and Major penalty” shall mean the same as defined in CCS Conduct Rules.
(9) “Misconduct” means misconduct as defined in relevant Conduct Rules and which has
vigilance angle.
(10) "public authority" means any authority or body or institution of self- government
established or constituted—
a. by or under the Constitution;
b. by any other law made by Parliament;
c. by notification issued or order made by the Government, and includes any body owned,
controlled or substantially financed by the Government;
(11) “Public servant” means a person who is or was at any time,-
(a) the Prime Minister;
(b) a Minister;
(c) a Member of Parliament;
(d) Judges of High Courts and Supreme Courts;
(e) a Government servant;
(f) the Chairman or Vice-Chairman (by whatever name called) or a member of a local authority
in the control of the Central Government or a statutory body or corporation established by or
under any law of the Parliament of India, including a co-operative society, or a Government
Company within the meaning of section 617 of the Companies Act, 1956 and members of
any Committee or Board, statutory or non-statutory, constituted by the Government;
(g) includes all those who are declared as “public servants” in section 2(c) of Prevention of
Corruption Act 1988.
(h) Such other authorities as the Central Government may, by notification, from time to time,
specify;
(12) “Vigilance angle” includes –
(a) All acts of corruption
(b) Gross or willful negligence; recklessness in decision making; blatant violations of systems
and procedures; exercise of discretion in excess, where no ostensible/public interest is
evident; failure to keep the controlling authority/superiors informed in time
(c) Failure/delay in taking action, if under law the government servant ought to do so, against
subordinates on complaints of corruption or dereliction of duties or abuse of office by the
subordinates
(d) Indulging in discrimination through one’s conduct, directly or indirectly.
(e) Victimizing Whistle Blowers
(f) Any undue/unjustified delay in the disposal of a case, perceived after considering all
relevant factors, would reinforce a conclusion as to the presence of vigilance angle in a case.
(g) Make or undertake an unfair investigation or enquiry either to unduly help those guilty of
corruption or incriminate the innocent.
(h) Any other matter as notified from time to time by the Lokpal
(13) “Whistleblower” is any person, who faces the threat of
(a) professional harm, including but not limited to illegitimate transfer, denial of promotion,
denial of appropriate perquisites, departmental proceedings, discrimination or
(b) physical harm, or
(c) is actually subjected to such harm;
because of either making a complaint to the Lokpal under this Act, or for filing an application
under the Right to Information Act, 2005 or by any other legal action aimed at preventing or
exposing corruption or mal-governance.
3. Establishment of the institution of Lokpal and appointment of Lokpal:
(1) There shall be an institution known as Lokpal which shall consist of one Chairperson and
ten members along with its officers and employees.
(2) The Chairperson and members of Lokpal shall be selected in such manner as laid down in
this Act.
(3) A person appointed as Chairperson or member of Lokpal shall, before entering upon his
office, make and subscribe before the President, an oath or affirmation in the form as
prescribed.
(4) The Government shall appoint the Chairperson and members of the first Lokpal and set up
the institution with all its logistics and assets within six months of enactment of this Act.
(5) The Government shall fill up a vacancy of the Chairperson or a member caused due to
a) Retirement, 3 months before the member or the Chairperson retires.
b) Any other unforeseen reason, within a month of such vacancy arising.
Chairperson and Members of Lokpal
4. The Chairperson and members of Lokpal not to have held certain offices- The Chairperson
and members of Lokpal shall not be serving member of either the Parliament or the Legislature of
any State and shall not hold any office or trust of profit (other than the office as Chairperson or
member) or carry on any business or practice any profession and accordingly, before he enters upon
his office, a person appointed as the Chairperson or member of Lokpal shall-
(i) if he holds any office of trust or profit, resign from such office; or
(ii) if he is carrying on any business, sever his connection with the conduct and
management of such business; or
(iii) if he is practicing any profession, suspend practice of such profession.
(iv) If he is associated directly or indirectly with any other activity, which is likely cause
conflict of interest in the performance of his duties in Lokpal, he should suspend his
association with that activity.
Provided that if even after the suspension, the earlier association of that person
with such activity is likely to adversely affect his performance at Lokpal, that
person shall not be appointed as a member or Chairperson of Lokpal.
5. Term of office and other conditions of service of Lokpal– (1) A person appointed as the
Chairperson or member of Lokpal shall hold office for a term of five years from the date on which
he enters upon his office or upto the age of 70 years, whichever is earlier;
Provided further that.-
(a) the Chairperson or member of Lokpal may, by writing under his hand addressed to
the President, resign his office;
(b) the Chairperson or member may be removed from office in the manner provided in
this Act.
(2) There shall be paid to the Chairperson and each member every month a salary equal to that of
the Chief Justice of India and that of the judge of the Supreme Court respectively;
(3) The allowances and pension payable to and other conditions of service of the Chairperson or a
member shall be such as may be prescribed;
Provided that the allowances and pension payable to and other conditions of service of the
Chairperson or members shall not be varied to his disadvantage after his appointment.
(4) The administrative expenses of the office of the Lokpal including all salaries, allowances and
pensions payable to or in respect of persons serving in that office, shall be charged on the
Consolidated Fund of India.
(5) There shall be a separate fund by the name of “Lokpal fund” in which penalties/fines imposed
by the Lokpal shall be deposited and in which 10% of the loss of Public Money recovered under
section 19 of this Act shall also be deposited by the Government. Disposal of such fund shall be
completely at the discretion of the Lokpal and such fund shall be used only for
enhancement/upgradation/extension of the infrastructure of Lokpal.
(6) The Chairperson and members of Lokpal shall not be eligible for appointment to any position in
Government of India or Government of any state or any such body which is funded by any of the
governments or for contesting elections to Parliament, state legislatures or local bodies, if he has
ever held the position of the Chairperson or a member for any period after demitting their office. A
member could be appointed as a chairperson, provided that the total tenure both as member and as
chairperson would not exceed five years and no member or chairperson would be eligible for
reappointment or extension after completion of a five year term.
6. Appointment of the Chairperson and members:
1. The Chairperson and members shall be appointed by the President on the recommendation
of a selection committee.
2. The following shall not be eligible to become Chairperson or Member of Lokpal:
(a) Any person, who is not a citizen of India
(b) Any person, who was ever chargesheeted for any offence under IPC or PC Act or any other
Act or was ever penalized under CCS Conduct Rules.
(c) Any person, who is less than 40 years in age.
(d) Any person, who was in the service of any government and has remitted office within the
last two years, either by way of resignation or retirement.
3. At least four members of Lokpal shall have legal background. Not more than two members,
including Chairman, shall be former civil servants.
Explanation: “Legal Background” means that the person should have held a judicial office
in the territory of India for at least ten years or has been an advocate in High Court or
Supreme Court for at least fifteen years.
4. The members and Chairperson should have unimpeachable integrity and should have
demonstrated their resolve to fight corruption in the past.
5. A selection committee consisting of the following shall be set up:
a. The Prime Minister of India
b. Leader of Opposition in Lok Sabha
c. Two youngest judges of Supreme Court
d. Two youngest Chief Justices of High Courts.
e. Comptroller and Auditor General of India
f. Chief Election Commissioner
g. After the first set of selection process, the outgoing members and Chairperson of Lokpal.
6. The Vice President shall act as the Chairperson of the selection committee.
7. There shall be a search committee consisting of ten members.
8. Members of search committee shall be selected in the following manner:
a. The selection committee shall select five members of search committee from the former
Comptroller and Auditor Generals of India and Chief Election Commissioners of India.
Provided that the following persons shall not be eligible for becoming members of
search committee:
a) Any person who has had any substantive allegation of corruption against him
b) Any person who has either joined any political party after retirement or has had
strong affiliations to any political party
c) Any person who is still in the service of the government in any capacity
d) Any person who took up a government assignment after retirement barring those
assignments which are reserved for the post from which he has retired.
b. The five members selected above shall nominate five members from civil society.
9. The search committee shall invite recommendations from such class of people or such
individuals as it deems fit. The recommendations should, interalia, contain the following
details:
a. Personal details of the candidate being recommended
b. Details of any allegations faced by the candidate under any law or any allegations of
moral turpitude in the past?
c. Details of his work against corruption in the past with documentary evidence.
d. Evidence from his past, if any, to show that he is a fiercely independent person and
cannot be influenced.
e. Any other material that the search committee decides.
10. The following selection process shall be followed:
a. The list of candidates received above along with their details received in the format
mentioned above shall be displayed on a website.
b. Public feedback shall be invited on these names.
c. The search committee may decide to use any means to collect more information about
the background and past achievements of these candidates.
d. All the material obtained so far about the candidates shall be made available to each
member of the search committee in advance. The members shall make their own
assessment of each candidate.
e. The search committee shall meet and discuss the material so received about each
candidate. The selections shall be made preferably through consensus.
Provided that if three or more members of search committee, for reasons to be
recorded in writing, object to the selection of any member, he shall not be selected.
f. Search committee shall recommend three times the names as there are vacancies to the
selection committee.
g. Selection committee shall select such number of candidates as there are vacancies to the
Prime Minister. The selections shall be made preferably through consensus.
Provided that if three or more members of selection committee, for reasons to be
recorded in writing, object to the selection of any member, he shall not be selected.
h. All meetings of search committee and selection shall be video recorded and shall be
made public.
11. The Prime Minister shall recommend the names finalized by the selection committee to the
President immediately, who shall order such appointments within a month of receipt of the
same.
12. If any of the members of the selection committee retires while a selection process is going
on, that member will continue on the selection committee till the end of that process.
7. Removal of Chairperson or members-
(1) The Chairperson or any member shall not be removed from his office except by an order of the
President on one or more of the following grounds:
a. Proved misbehavior
b. Professional, mental or physical incapacity
c. Insolvency
d. Being charged of an offence which involves moral turpitude
e. Engaging while holding such office, in any paid employment
f. Acquiring such financial interests or other interests, which are likely to affect his
functions as member or Chairperson prejudicially.
g. Being guided by considerations extraneous to the merits of the case under his
consideration with a view to favoring someone or implicating someone through any act
of omission or commission.
h. Unduly influencing or attempting to influence any government functionary.
i. Committing any act of omission or commission which is punishable under Prevention of
Corruption Act or is a misconduct.
j. If a member or the Chairperson in any way, concerned or interested in any contract or
agreement made by or on behalf of any public authority in the Government of India or
Government of any state or participates in any way in the profit thereof or in any benefit
or emolument arising there from otherwise than as a member and in common with the
other members of an incorporated company, he shall be deemed to be guilty of
misbehavior.
(3) The following process shall be followed in respect of petitions for the removal of any member
or Chairperson of Lokpal:
(a) Any person may move a petition before the Supreme Court seeking removal of one or
more of the members or Chairperson of Lokpal, alleging one or more of the grounds for removal
and providing evidence for the same.
(b) The Supreme Court will hear the matter on receipt of such petition and may take one or
more of the following steps:
(i) order an investigation by a Special Investigation Team appointed by the Supreme
Court, if a prima facie case is made out and if the matter cannot be judged based on
affidavits of the parties. The Special Investigation Team shall submit its report within three
months.
(ii) Pending investigations by a Special Investigation Team under sub-clause (i),
order withdrawal of a part or complete work from that member.
(iii) dismiss the petition if no case is made out
(iv) if the grounds are proved, recommend to the President for removal of the said
member or Chairperson
(v) direct registration and investigation of cases with appropriate agencies, if there is
a prima facie case of commission of an offence punishable under the Prevention of
Corruption Act or any other law.
(e) The bench shall be constituted by a panel of five seniormost judges of the Supreme Court.
Provided that the judges who have ever been members of the selection committee or
against whom any complaint is pending in Lokpal shall not be members of the bench.
(f) The Supreme Court shall not dismiss such petitions in liminae.
(g) If the Supreme Court concludes that the petition has been made with mischievous or
malafide motives, the Court may order imposition of fine or imprisonment upto one year
against the complainant.
(h) On receipt of a recommendation from the Supreme Court under clause (b)(iv) supra, the
Prime Minister shall immediately recommend the removal of the member(s) or Chairperson
of Lokpal to the President, who shall order the removal of the said member(s) or
Chairperson within a month of receipt of the same.
Powers and Functions of Lokpal
8. Functions of Lokpal: (1) the Lokpal shall be responsible for receiving:
(a) Complaints where there are allegations of acts of omission or commission punishable under
the Prevention of Corruption Act
(b) Complaints where there are allegations of misconduct by a government servant,
(c) Grievances
(d) Complaints from whistleblowers
(e) Complaints against the staff of Lokpal
(1A) It shall be the prime duty of Lokpal to ensure the integrity of its own staff and employees,
whether temporary or otherwise. Lokpal shall be competent and empowered to take all actions to
ensure that.
(2) The Lokpal, after getting such enquiries and investigations done as it deems fit, may take one or
more of the following actions:
a. Close the case, if prima facie, the complaint is not made out, or
b. Initiate prosecution against public servants as well as those private entities, which are
parties to the act
c. Recommend imposition of appropriate penalties under the relevant Conduct Rules
Provided that if a government servant is finally convicted under the
Prevention of Corruption Act, the penalty of dismissal shall be
recommended on such government servant.
d. Order cancellation or modification of a license or lease or permission or contract or
agreement, which was the subject matter of investigation.
e. Blacklist the concerned firm or company or contractor or any other entity involved in
that act of corruption.
f. Issue appropriate directions to appropriate authorities for redressal of grievance as per
provisions of this Act.
g. Invoke its powers under this Act if its orders are not duly complied with and ensure due
compliance of its orders.
h. Take necessary action to provide protection to a whistleblower as per various provisions
of this Act.
(3) Suo moto initiate appropriate action under this Act if any case, of the nature mentioned in
clauses (a), (b), (c) or (d) of sub-section (1), comes to the knowledge of the Lokpal from any
source.
(4) Issue such directions, as are necessary, from time to time, to appropriate authorities so as to
make such changes in their work practices, administration or other systems so as to reduce the
scope and possibility for corruption, misconduct, public grievances and whistleblower
victimization.
(5) Orders made by Lokpal under sub-section (2)(c) of this section shall be binding on the
government and the government shall implement it within a week of receipt of that order.
(6) Section 19 of the Prevention of Corruption Act shall be deleted. Section 6A of Delhi Special
Police Establishment Act shall not be applicable to the proceedings under this Act.
(7) Section 197 of CrPC shall not apply to any proceedings under this Act. All permissions, which
need to be sought for initiating investigations or for initiating prosecutions under any Act shall be
deemed to have been granted once Lokpal grants such permissions.
9. Issue of Search Warrant, etc.- (1) Where, in consequence of information in his possession, the
Lokpal
(a) has reason to believe that any person. –
(i) to whom a summon or notice under this Act, has, been or might be issued,
will not or would not produce or cause to be produced any property,
document or thing which will be necessary or useful for or relevant to any
inquiry or other proceeding to be conducted by him;
(ii) is in possession of any money, bullion, jewellery or other valuable article
or thing and such money, bullion, jewellery or other valuable article or thing
represents either wholly or partly income or property which has not been
disclosed to the authorities for the purpose of any law or rule in force which
requires such disclosure to be made; or
(b) considers that the purposes of any inquiry or other proceedings to be conducted by him
will be served by a general search or inspection,
It may by a search warrant authorize any Police officer not below the rank of an Inspector of Police
to conduct a search or carry out an inspection in accordance therewith and in particular to, -
(i) enter and search any building or place where he has reason to suspect that such
property, document, money, bullion, jewellery or other valuable article or thing is kept;
(ii) search any person who is reasonably suspected of concealing about his person any
article for which search should be made;
(iii) break open the lock of any door, box, locker safe, almirah or other receptacle for
exercising the powers conferred by sub-clause (i) where the keys thereof are not available.
1. Seize any such property, document, money, bullion, jewellery or other valuable article or
thing found as a result of such search;
(iv) place marks of identification on any property or document or make or cause to be
made; extracts or copies therefrom; or
(v) make a note or an inventory of any such property, document, money, bullion,
Jewellery or other valuable article or thing.
(2) The provisions of the Code of Criminal Procedure, 1973, relating to search and seizure shall
apply, so far as may be, to searches and seizures under sub-section (1).
(3) A warrant issued under sub-section (1) shall for all purposes, be deemed to be a warrant issued
by a court under section 93 of the Code of Criminal Procedure, 1973.
10. Evidence - (1) Subject to the provisions of this section, for the purpose of any investigation
(including the preliminary inquiry, if any, before such investigation) under this Act, the Lokpal may
require any public servant or any other person who, in its opinion is able to furnish information or
produce documents relevant to the investigation, to furnish any such information or produce any
such document.
(2) For the purpose of any such investigation (including the preliminary inquiry) the Lokpal
shall have all the powers of a civil court while trying a suit under the Code of Civil Procedure, 1908
, in respect of the following matters, namely:-
(a) Summoning and enforcing the attendance of any person and examining him on
oath;
(b) Requiring the discovery and production of any document;
(c) Receiving evidence on affidavits;
(d) Requisitioning any public record or copy thereof from any court or office ;
(e) Issuing commissions for the examination of witnesses or documents ;
(f) ordering payment of compensatory cost in respect of a false or vexatious claim
or defence;
(g) ordering cost for causing delay;
(h) Such other matters as may be prescribed.
(3) Any proceeding before the Lokpal shall be deemed to be a judicial proceeding with in the
meaning of section 193 of the Indian Penal Code.
11. Reports of Lokpal, etc. (1) The Chairperson of Lokpal shall present annually a consolidated
report in prescribed format on its performance to the President.
(2) On receipt of the annual report, the President shall cause a copy thereof together with an
explanatory memorandum to be laid before each House of the Parliament.
(3) The Lokpal shall publish every month on its website the list of cases disposed with brief details
of each such case, outcome and action taken or proposed to be taken in that case. It shall also
publish lists of all cases received by the Lokpal during the previous month, cases disposed and
cases which are pending.
12. Lokpal to be a deemed police officer: (1) For the purposes of section 36 of Criminal
Procedure Code, the Chairperson, members of Lokpal and the officers in investigation wing of
Lokpal shall be deemed to be police officers.
(2) While investigating any offence under Prevention of Corruption Act 1988, they shall be
competent to investigate any offence under any other law in the same case.
13. Powers in case of non-compliance of orders: (1) Each order of the Lokpal shall clearly
specify the names of the officials who are required to execute that order, the manner in which it
should be executed and the time period within which that order should be complied with.
(2) If the order is not complied with within the time or in the manner directed, the Lokpal may
decide to impose a fine on the officials responsible for the non-compliance of its orders.
(3) The Drawing and Disbursing Officer of that Department shall be directed to deduct such amount
of fine as is clearly specified by the Lokpal in its order made in sub-section (2) from the salaries of
the officers specified in the order.
Provided that no penalty shall be imposed without giving a reasonable opportunity of being heard.
Provided that if the Drawing and Disbursing Officer fails to deduct the salary as specified in the
said order, he shall make himself liable for a similar penalty.
(4) In order to get its orders complied with, the Lokpal shall have, and exercise the same
jurisdiction powers and authority in respect of contempt of itself as a High court has and may
exercise, and, for this purpose, the provisions of the Contempt of Courts Act, 1971 (Central Act 70
of 1971) shall have the effect subject to the modification that the references therein to the High
Court shall be construed as including a reference to the Lokpal.
13A. Special Judges under section 4 of Prevention of Corruption Act: (1) On an annual basis,
the Lokpal shall make an assessment of the number of Special Judges required under section 4 of
the Prevention of Corruption Act 1988 in each area and the Government shall appoint such number
of Judges within three months of the receipt of such recommendation.
Provided that the Lokpal shall recommend such number of Special Judges so that trial in each case
under this Act is completed within a year.
(2) Before making any fresh appointments, the Government shall consult the Lokpal on the
procedure to be followed in selection to ensure the integrity of the candidates selected. The
Government shall implement such recommendations.
13B. Issue of Letter Rogatory: A bench of the Lokpal shall have powers to issue Letters Rogatory
in any case pending with the Lokpal.
13C. Powers under Indian Telegraph Act: An appropriate bench of Lokpal shall be deemed to be
designated authority under section 5 of Indian Telegraph Act. Such bench would be empowered to
approve interception and monitoring of messages of data or voice transmitted through telephones,
internet or any other medium as covered under India Telegraph Act, read with Information and
Technology Act 2000 and as per rules and provisions made under Indian telegraph Act 1885.
Functioning of Lokpal
14. Functioning of Lokpal: (1) The Chairperson shall be responsible for the overall administration
and supervision of the institution of Lokpal.
(2) All policy level decisions including formulation of regulations, developing internal systems for
the functioning of Lokpal, assigning functions to various officials in Lokpal, delegation of powers
to various functionaries in Lokpal etc shall be taken by the Chairperson and the members
collectively as a body.
(3) The Chairperson shall have an annual meeting with the Prime Minister to assess the needs of
Lokpal for finances and manpower. Lokpal shall be provided resources by the Government on the
basis of outcome of this meeting.
(3A) The expenditure so decided shall be charged to Consolidated Fund of India.
(3B) The Chairperson and its members of Lokpal shall take all steps to ensure the integrity of its
employees and integrity of all enquiries and investigations. For this purpose, they shall be
competent to make rules, prescribe work norms, prescribe procedures for swift and effective
punishment against inefficient and corrupt employees and take any other step as they deem fit.
(3C) The Chairperson and members of Lokpal shall be responsible for and shall be competent to
take all steps to ensure that the time limits provided in this Act are adhered to strictly.
(3D) Lokpal shall be completely independent of the government in all matters including
administrative, financial and functional.
(4) Lokpal shall function in benches of three or more members. Benches shall be constituted
randomly and cases shall be assigned to them randomly by computer. Each bench shall consist of at
least one member with legal background.
(5) Such benches shall be responsible for
(i) granting permission to initiate prosecution in certain category of cases.
(ii) Hearing cases of complaints against its own staff.
(iii) Appeals in such cases of investigation or vigilance, which are closed by officials of
Lokpal and which are of such categories as are prescribed by Lokpal from time to time.
(iv)Such other orders as may be decided by Lokpal from time to time.
Provided that the full bench of Lokpal may lay down norms as to which category of cases
will be dealt by the benches of members and which cases would be decided at the levels of
Chief Vigilance officers or Vigilance Officers. The norms could be based on loss caused to
the government and/or impact on public and/or the status of the accused.
(6) The Lokpal may decide to initiate investigations into any case suo motu.
(7) The decision to initiate investigation or prosecution against any member of the Cabinet shall be
taken by full bench of Lokpal.
(8) Certain matters, as provided under this Act shall be dealt by the full bench of Lokpal, which
shall consist of at least seven members.
(9) Minutes and records of meetings of Lokpal shall be made public.
15. Making a complaint to the Lokpal: (1) Subject to the provisions of this Act, any person may
make a complaint under this Act to the Lokpal.
Provided that in case of a grievance, if the person aggrieved is dead or for any reason,
unable to act for himself, the complaint may be made or if it is already made may be continued by
his legal representatives or by any other person who is authorized by him in writing in this behalf.
Provided further that a citizen may make a complaint to any office of Lokpal anywhere in
the country. It shall be the duty of that office of Lokpal to transfer it to appropriate officer within
Lokpal.
(2) A complaint could be on a plain paper but should contain all such details as prescribed by
Lokpal.
(2A) After its annual report has been presented in the Parliament, the Comptroller and Auditor
General of India shall forward all such cases, which constitute an allegation under this Act, to the
Lokpal and Lokpal shall act on them as per provisions of this Act.
(3) On receipt of a complaint, the Lokpal shall decide whether it is an allegation or a grievance or a
request for whistleblower protection or a mixture of two or more of these.
(4) Every complaint shall have to be compulsorily disposed of by the Lokpal.
Provided that no complaint shall be closed without giving an opportunity of hearing to the
complainant.
16. Matters which may be investigated by the Lokpal– Subject to the provisions of this Act, the
Lokpal may investigate any action which is taken by or with the general or specific approval of a
public servant where a complaint involving a grievance or an allegation is made in respect of such
action.
Provided that the Lokpal may also investigate such action suo moto or if it is referred to it
by the government, if such action can be or could have been in his recorded opinion, subject of a
grievance or an allegation.
17. Matters not subject to investigation:- (1) The Lokpal shall not conduct any investigation
under this Act in case of a grievance in respect of any action-
(i) if the complainant has or had, any remedy by way of appeal, revision, review or any other
recourse before any authority provided in any other law and he has not availed of the same.
(ii) Taken by a judicial or quasi-judicial body, unless the complainant alleges malafides
(iii) If the substance of the entire grievance is pending before any court or quasi-judicial
body of competent jurisdiction.
(iv)any grievance where there is inordinate and inexplicable delay in agitating it.
(2) Nothing in this Act shall be construed as authorising the Lokpal to investigate any action which
is taken by or with the approval of the Presiding Officer of either House of Parliament.
(3) Nothing in this section shall bar Lokpal from entertaining a complaint making an allegation of
misconduct or corruption or a complaint from a whistleblower seeking protection.
18. Provisions relating to complaints and investigations-
(i) (a) The Lokpal, on receipt of a complaint in the nature of an allegation or a grievance or a
combination of the two, or in a case initiated on his own motion, may on perusing the
documents, either decide to proceed to enquire or investigate into that complaint or decide,
to make such preliminary inquiry before proceeding to enquire or investigate into such
complaint or direct any other person to make such preliminary inquiry as it deems fit for
ascertaining whether there exists a reasonable ground for conducting the investigation. The
outcome of such preliminary enquiry, and if the complaint is being closed along with
reasons for the same and all material collected during preliminary enquiry, shall be
communicated to the complainant.
Provided that if any case is closed, all documents related thereto shall thereafter be
treated as public. Every month, a list of all such cases shall be put on the website with
reasons for closing a case. All material connected with such closed cases will be
provided to anyone seeking it under Right to Information Act.
Provided further that no complaint of allegation shall be rejected on the basis of the
motives or intention of the complainant.
Provided further that all hearings before Lokpal shall be video recorded and shall be
available to any member of the public on payment of copying costs.
(b) The procedure for preliminary enquiry of a complaint shall be such as the Lokpal
deems appropriate in the circumstances of the case and in particular, the Lokpal may, if
it deems necessary to do so, call for the comments of the public servant concerned.
Provided that the preliminary enquiry should be completed and a decision taken
whether to close a case or to proceed with investigations preferably within one month of
receipt of any complaint, and positively within three months. Where the preliminary
enquiry has not been completed within one month, reasons for the delay will be recorded
in writing at the completion of the enquiry and made public.
(c) No anonymous complaint shall be entertained under this Act. The Complainant will
have to reveal his identity to the Lokpal. However, if the complainant so desires, his
identity shall be protected by Lokpal.
(ii) Where the Lokpal proposes, either directly or after making preliminary inquiry, to conduct
any investigation under this Act, it.-
(a) may make such order as to the safe custody of documents relevant to the
investigation, as it deems fit.
(b) at appropriate stage of investigations or in the end, it shall forward a copy of the
complaint, its findings and copy of the material relied upon to the public servant
concerned and the complainant,
(c) shall afford to such public servant and the complainant an opportunity to offer
comments and be heard.
Provided that such hearing shall be held in public, except in rare circumstances, to be
recorded in writing, where it is not in public interest and in the interest of justice to
hold it in public, it will be held in camera.
(iii) The conduct of an investigation under this Act against a public servant in respect of
any action shall not affect such action, or any power or duty of any other public servant to
take further action with respect to any matter subject to the investigation.
(iv)If, during the course of a preliminary inquiry or investigation under this Act, the Lokpal is
prima facie satisfied that the allegation or grievance in respect of any action is likely to be
sustained either wholly or partly, it may, through an interim order, recommend the public
authority to stay the implementation or enforcement of the decision or action complained
against, or to take such mandatory or preventive action, on such terms and conditions, as it
may specify in its order to prevent further harm from taking place. The public authority shall
either comply with or reject the recommendations of Lokpal under this sub-section within
15 days of receipt of such an order. Lokpal, if it feels important, may approach appropriate
High Court for seeking appropriate directions to the public authority.
(v) The Lokpal, either during the course of investigations, if it is satisfied that prosecution is
likely to be initiated in that case, or at the end of the investigations at the time of initiating
prosecution, shall make a list of moveable and immoveable assets of all the accused in that
case and shall notify the same. No transfer of the same shall be permitted after such
notification. In the event of final conviction, the trial court may, in addition to other
measures, recover the loss determined under section 19 of this Act from this property,.
(vi)If during the course of investigation or enquiry into a complaint, the Lokpal feels that
continuance of a public servant in that position could adversely affect the course of
investigations or enquiry or that the said public servant is likely to destroy or tamper with
the evidence or influence the witnesses, the Lokpal may issue appropriate recommendations
including transfer of that public servant from that position or his suspension, if he is a
government servant. The public authority shall either comply with or reject the
recommendations of Lokpal under this sub-section within 15 days of receipt of such an
order. Lokpal, if it feels important, may approach appropriate High Court for seeking
appropriate directions to the public authority.
(vii) The Lokpal may, at any stage of inquiry or investigation under this Act, direct
through an interim order, appropriate authorities to take such action as is necessary, pending
inquiry or investigation.-
(a) to safeguard wastage or damage of public property or public revenue by the administrative
acts of the public servant;
(b) to prevent further acts of misconduct by the public servant;
(c) to prevent the public servant from secreting the assets allegedly acquired by him by corrupt
means;
The public authority shall either comply with or reject the recommendations of
Lokpal under this sub-section within 15 days of receipt of such an order. Lokpal, if it
feels important, may approach appropriate High Court for seeking appropriate
directions to the public authority.
(viii) Where after investigation into a complaint, the Lokpal is satisfied that the complaint
involving an allegation against the public servant, other than the Ministers, Members of
Parliament and judges, is substantiated and that the public servant concerned should not
continue to hold the post held by him, the Lokpal shall pass orders to that effect. In case of
public servant being a Minister, Lokpal shall make such recommendation to the President,
who shall decide either to accept such recommendation or reject it within a month of its
receipt.
Provided that the provisions of this section shall not apply to the Prime Minister.
(ix)All records and information of Lokpal shall be public and shall be accessible under Right to
Information Act, even at the stage of investigation or enquiry, unless the release of such
information would adversely affect the process of enquiry or investigation.
Recovery of Loss to the Government and punishments
19. Recovery of loss to the Government: When a person is convicted of an offence under the Prevention of
Corruption Act 1988, then the trial court shall quantify the loss caused to the government and additional
gains that the accused would have earned by investing the proceeds of corruption and apportion such total
amount amongst various convicts from whom this money must be recovered as arrears of land revenue.
19A. Punishments for offences: For offences mentioned in Chapter III of the Prevention of Corruption Act,
the proviso to section 2(4) of this Act and section 28A of this Act, the punishment shall not be less than one
year of rigorous imprisonment and may extend upto life imprisonment.
Provided that the punishment shall be more severe if the accused is higher in rank.
Provided further that if the offence is of the nature mentioned in the proviso to section 2(4) of this Act and
if the beneficiary is a business entity, in addition to other punishments mentioned in this Act and under the
Prevention of Corruption Act, a fine amounting to five times the loss caused to the public shall be recovered
from the accused and the recovery may be done from the assets of the business entity and from the
personal assets of all its Directors, if the assets of the accused are inadequate.
Dealing with complaints against judges of High Courts or Supreme Court
19B. Receiving and disposing complaints against Judges of High Courts or Supreme Court: (1) Any
complaint against any Judge of a High Court or Supreme Court shall be dealt only by the office of the
Chairperson of Lokpal.
(2) Each such complaint shall be subjected to a preliminary screening, which shall determine whether prima
facie evidence exists of an offence under Prevention of Corruption Act. The screening shall be done by a
member of Lokpal, who shall then present his findings to a full bench of Lokpal.
Provided that such full bench shall have at least three legal members.
(3) A case shall not be registered without the approval of a full bench of Lokpal with majority of members of
that bench being from legal background.
(4) Such case shall be investigated by a special team headed by an officer not below the rank of a
Superintendent of Police.
(5) A decision whether to initiate prosecution shall be taken by a full bench of Lokpal with majority of
members with legal background.
Whistleblower protection
20. Protection of Whistleblower: (1) A whistleblower may seek the protection of the Lokpal if he
has been subjected to or threatened with, professional or physical victimization.
(2) On receiving such a complaint, Lokpal shall take following steps:
(a) Professional victimization: If after conducting appropriate enquiries, the Lokpal feels
that there is a real threat to the whistleblower on account of having made an allegation under
this Act, it shall, as soon as possible but not more than a month of receipt of such complaint,
direct appropriate authorities to take such steps as directed by the Lokpal.
(b) If a whistleblower complains that he has been victimized professionally on account of
making an allegation under this Act and the Lokpal, after conducting enquiries, is of the
opinion that the whistleblower has been victimized for having made an allegation under this
Act, it shall, as soon as possible but in not more than a month, direct appropriate authorities
to take such steps as directed by the Lokpal.
Provided that for clause (a) the Lokpal may, but for clause (b) the Lokpal shall, also
issue orders imposing appropriate penalties under relevant Rules against the government
servants who issued threats or caused victimization.
Provided further that no such penalties shall be imposed without giving an
opportunity of being heard to the affected government servants.
(c) Threat of physical victimization: Lokpal shall conduct appropriate enquiries and if it
feels that there is a real threat to the person and the threat is on account of that person having
made an allegation under this Act or for having filed an RTI application to any public
authority covered under this Act, then notwithstanding anything contained in any other law,
the Lokpal shall pass appropriate orders, as soon as possible but in not more than a week,
directing appropriate authorities, including police, to take such steps as directed by the
Lokpal to provide adequate security to that person, to register criminal cases against those
who are issuing threats and also to take all such steps necessary to mitigate circumstances
leading to such threat.
Provided that if the threat is imminent, Lokpal shall act immediately, within a few
hours to prevent physical assault on that person. If the complainant wishes to meet the
Chairperson or a member, he shall be entitled to talk to them either on phone or through
video conferencing or in person, according to the desire of the complainant.
(d) If a person complains that he has already been physically assaulted on account of making
an allegation under this Act and if Lokpal is satisfied after conducting enquiries that the
person has been assaulted because of his having made an allegation under this Act or for
filing an RTI application in any of the public authorities covered under this Act, then
notwithstanding anything else contained in any other law, the Lokpal shall pass such orders,
as soon as possible but in not more than 24 hours, directing the concerned authorities to take
such steps as directed by the Lokpal to provide adequate security to that person, to register
criminal cases and also to ensure that no further harm visits on that person. If the
complainant wishes to meet the Chairperson or a member, he shall be entitled to talk to them
either on phone or through video conferencing or in person, according to the desire of the
complainant.
(da) If a whistleblower alleges that police or any other authority has registered or initiated
any case against the complainant or any other person on account of making a complaint
under this Act or for using RTI Act, the Lokpal may, on the basis of enquiries, issue orders
to appropriate authorities, to withdraw such case.
(db) In case of threat of physical victimization or if any person has been assaulted, that
person, or any other person may complaint to any office of Lokpal anywhere in the country
and it shall be the duty of that official of Lokpal to forward such complaint immediately to
appropriate officer within Lokpal.
(dc) Lokpal may delegate the responsibility of providing protection to whistleblowers to
upto the level of Vigilance Officers and in such case, such officers shall have the powers to
direct the appropriate authorities, including local police, to take such steps as are necessary
to ensure protection of that whistleblower.
(dd) If, after making a complaint to the Lokpal, any person is still assaulted, the concerned
officials in Lokpal will be held responsible for criminal dereliction of duty or connivance or
both, unless they are able to prove otherwise.
(e) If the whistleblower has alleged an act punishable under Prevention of Corruption Act,
then for cases under clause (c), Lokpal may and for cases under clause (d), the Lokpal shall,
assign the allegations made by that person to a special team, put it on a fast track and
complete investigations in that case in not more than a month.
(f) If the whistleblower has alleged an act punishable under any law other than the
Prevention of Corruption Act, then for cases under clause (c), Lokpal may and for cases
under clause (d), the Lokpal shall, direct the agency which has the powers to enforce that
law to assign the allegations made by the whistleblower to a special team, put it on a fast
track and complete investigations in that case in such time as directed by the Lokpal.
(g) Lokpal shall have the powers to issue directions to appropriate agencies in the cases
covered under clause (f), monitor such investigations and if necessary, issue directions to
that agency to do the investigations in the manner as directed by the Lokpal.
(h) Whistleblowers, who face threat of physical victimization or are actually assaulted may
directly approach the Chairperson of Lokpal who shall meet them within 24 hours of their
seeking such meeting and shall take appropriate action as per provisions of this Act.
(3) If any complainant requests that his identity should be kept secret, Lokpal shall ensure the same.
Lokpal shall prescribe detailed procedures on how such complaints shall be dealt with.
(4) Lokpal shall Issue orders to the Public Authorities to make necessary changes in their policies
and practices to prevent recurrence of victimization.
(5) Lokpal shall make appropriate rules for the receipt and disposal of complaints from
whistleblowers.
Grievance Redressal Systems
21. Citizens’ Charters: (1) Each public authority shall be responsible for ensuring the preparation
and implementation of Citizens Charter, within a reasonable time, and not exceeding one year from
the coming into force of this Act.
(2) Every Citizens Charter shall enumerate the commitments of the respective public authority to
the citizens, officer responsible for meeting each such commitment and the time limit with in which
the commitment shall be met.
(3) Each public authority shall designate an official called Public Grievance Redressal Officer,
whom a complainant should approach for any violation of the Citizens Charter.
Provided that a public authority shall appoint at least one Public Grievance Redressal Officer in
each station, where they have an office.
Provided further that the Public Grievance Redressal Officer shall either be Head of that
Department or an officer not more than one rank below him but if that station does not have a Head
of Department in any station, the seniormost officer in that station shall be appointed as the Public
Grievance Redressal Officer.
(4) Every public authority shall review and revise its Citizens Charter at least once every year
through a process of public consultation to be held in the presence of Chief Vigilance Officer in that
public authority.
(5) Lokpal may direct any public authority to make such changes in their citizens’ charter as are
mentioned in that order and that public authority shall make such changes within a week of receipt
of such order.
Provided that such changes shall have to be approved by at least a three member bench of Lokpal.
Provided further than such changes should not increase the existing time limits or reduce the
number of items in citizen’s charter.
21A. Receipt and disposal of Grievances: (1) The Chief Vigilance Officer of any public authority
shall declare such number of Vigilance Officers, as it deems fit, to be known as Appellate Grievance
Officers, to receive and dispose grievances related to that public authority.
(2)If a citizen fails to receive satisfactory redressal to his grievance within a month of making a
complaint to Public Grievance Redressal Officer, can make a complaint to Appellate Grievance
Officer.
Provided that if Appellate Grievance Officer feels that considering the gravity or urgency of the
grievance, it is necessary to do so, he may decide to accept such grievance earlier also.
(3) If the complaint does not relate to an issue mentioned in Citizen’s Charter of that public
authority, the Appellate Grievance Officer, within a month of receipt of complaint, pass an order
either rejecting the grievance or directing the public authority to redress the grievance in the manner
and within such time, as is mentioned in the order.
Provided that no grievance shall be rejected without giving a reasonable opportunity of being heard
to the complainant.
(4) A complaint to the Appellate Grievance Officer shall be deemed to have a vigilance angle if any
of the following two conditions are satisfied:
(i) for issues mentioned in citizen’s charter, if a citizen fails to get satisfactory redressal from
Public Grievance Redressal Officer.
(ii) for issues other than those mentioned in citizen’s charter, if the orders of Appellate
Grievance Officer made under sub-section (3) of this section are violated.
(5) Each case, as mentioned in sub-section (4) of this section, shall be dealt in the following
manner:
(i) After giving a reasonable opportunity of being heard, the Appellate Grievance Officer
shall pass an order fixing responsibility for failure to satisfactorily redress complainant’s
grievance in prescribed time and direct the Drawing and Disbursing Officer of that public
authority to deduct from the salary of such officials, as mentioned in the order, such penalty
amounts as are directed by Appellate Grievance Officer, which shall not be less than Rs 250
per day of delay calculated from the day the time limit mentioned in citizens’ charter or the
time limit specified in the order passed under sub-section (3) of this section, for redressing
that grievance got over,
(ii) Direct the Drawing and Disbursing Officer to compensate the complainant with such
amounts as are deducted from the salaries of the said officers.
(6) The Officers mentioned in the order made under clause (i) of sub-section (5) of this section shall
be required to show cause that they acted in good faith and did not have corrupt motives. If they fail
to do so, the Appellate Grievance Officer shall proceed to recommend penalties against the said
officers under CCS Conduct Rules.
21B. Annual Integrity Audit: Lokpal shall conduct annual integrity audit of each department as per
guidelines to be made in this behalf by the Lokpal from time to time.
Imposition of major and minor penalties
21B. Allegations of misconduct shall be received and enquired by vigilance officers.
21C. Allegations of misconduct and public grievances with deemed vigilance angle under section 21A shall
be dealt in the following manner:
(1) The vigilance officer shall conduct an enquiry into each such case within three months of its receipt
and present its report to the Chief Vigilance Officer.
(2) Within a fortnight of receipt of report, the Chief Vigilance Officer shall constitute a three member
bench of Deputy Chief Vigilance Officers other than the one who conducted enquiry at clause (1)
above.
(3) The bench shall hold a summary hearing giving reasonable opportunity to the vigilance officer who
conducted enquiry, the complainant and the officers accused.
(4) The bench shall hold hearings on day to day basis and pass an order either imposing one or more of
the minor or major penalties on the accused government servants.
Provided that such orders shall be passed within a month of constitution of the bench.
Provided that such order shall be in the form of a recommendation to the appropriate appointing
authority.
(5) An appeal shall lie against the order of the bench before the Chief Vigilance officer, who shall pass
an order within a month of receipt of appeal, after giving reasonable opportunity to the accused,
the complainant and the vigilance officer who conducted enquiries.
Employees and staff and authorities in Lokpal
22. Chief Vigilance Officer: (1) There shall be a Chief Vigilance Officer in each public authority to
be selected and appointed by Lokpal.
(2) He shall not be from the same public authority.
(3) He shall be a person of impeccable integrity and ability to take proactive measures against
corruption.
(4) He shall be responsible for accepting complaints against any public authority and shall transfer the
complaints related to other public authorities within two days of receipt.
(5) He shall be responsible for carrying out all such responsibilities as assigned to him from time to time by
Lokpal including dealing with complaints in the manner as laid down by Lokpal from time to time.
Provided that the complaints which require investigations under Prevention of Corruption Act 1988 shall be
transferred to the Investigative wing of Lokpal.
Provided further that the complaints, other than grievances, against officers of the level of Joint Secretary
or above shall not be dealt by the Chief Vigilance Officer and shall be transferred to the Lokpal, who shall
set up a committee of Chief Vigilance Officers of three other public authorities to enquire into such
complaint.
(6) All the grievances shall be received and disposed by Chief Vigilance Officer on behalf of Lokpal, if the
citizen fails to get satisfactory redressal from Public Grievance Officer under section 21 of this Act.
(7) Such number of Vigilance Officers shall be appointed under the Chief Vigilance Officer as are decided by
Lokpal from time to time.
(8) The Vigilance Officers and the Chief Vigilance Officer shall have powers to enquire and impose penalties
under CCS Conduct Rules in such cases and as per such rules as laid down by the Lokpal from time to time.
23. Staff of Lokpal, etc.- (1) There shall be such officers and employees as may be prescribed to assist the
Lokpal in the discharge of their functions under this Act.
(2) The number and categories of officers and employees shall be decided by the Lokpal.
(3) The categories, recruitment and conditions of service of the officers and employees referred
in sub-section (1) including such special conditions or special pay as may be necessary for enabling them
to act without fear in the discharge of their functions, shall be such as may be prescribed by Lokpal.
Provided that no official, whose integrity is in doubt, shall be considered for being posted in
Lokpal.
Provided further that all officers and employees, who work in Lokpal on deputation or
otherwise shall be eligible for the same terms and conditions as prescribed under this clause.
(4) Without prejudice to the provisions of sub-section (1), the Lokpal may for the purpose of
conducting investigations under this Act utilize the services of.-
(a) any officer or investigating agency of the Central Government; or
(b) any officer or investigating agency of any other Government with the prior concurrence
of that Government; or
(c) any person, including private persons, or any other agency.
(5) The officers and other employees referred to in sub-section (1) shall be under the
administrative and disciplinary control of the Lokpal:
(6) Lokpal shall have the powers to choose its own officials. Lokpal may enlist officials on
deputation from other government agencies for a fixed tenure or it may enlist officials on permanent
basis from other government agencies or it may appoint people from outside on permanent basis or
on a fixed tenure basis.
(7) The staff and officers shall be entitled to such pay scales and other allowances, which
may be different and more than the ordinary pay scales in the Central Government, as are decided
by the Lokpal from time to time, in consultation with the Prime Minister, so as to attract honest and
efficient people to work in Lokpal.
(8) Lokpal shall be competent to increase or decrease its staff at various levels, within its
overall budgetary constraints, depending upon its workload and keeping in mind the terms and
conditions of the staff employed.
24. Repeal and savings – (1) The Central Vigilance Commission Act shall stand repealed.
(2) Notwithstanding such repeal, any act or thing done under the said Act shall be deemed to have
been done under this Act and may be continued and completed under the corresponding provisions
of this Act.
(3) All enquiries and investigations and other disciplinary proceedings pending before the Central
Vigilance Commission and which have not been disposed of, shall stand transferred to and be
continued by the Lokpal as if they were commenced before him under this Act.
(4) Notwithstanding anything contained in any Act, the posts of the Secretary and other Officers and
Employees of the Central Vigilance Commission are hereby abolished and they are hereby
appointed as the Secretary and other officers and employees of the Lokpal. The salaries, allowances
and other terms and conditions of services of the said Secretary, officers and other employees shall,
until they are varied, be the same as to which they were entitled to immediately before the
commencement of this Act.
(5) All vigilance administration under the control of all Departments of Central Government,
Ministries of the Central Government, corporations established by or under any Central Act,
Government companies, societies and local authorities owned or controlled by the Central
Government shall stand transferred, alongwith its personnel, assets and liabilities to Lokpal for all
purposes.
(6) The personnel working in vigilance wings of the agencies mentioned in sub-section (5) shall be
deemed to be on deputation to Lokpal for a period of five years from the date they are transferred to
Lokpal. However, Lokpal may decide to repatriate any one of them anytime.
(7) That Department from where any personnel have been transferred to Lokpal under sub-section
(5), shall cease to have any control over the administration and functions of transferred personnel.
(8) Lokpal shall rotate the personnel and create vigilance wing of each department in such a way
that no personnel from the same department get posted for vigilance functions in the same
department.
(9) No person shall be employed with Lokpal against whom any vigilance enquiry or any criminal
case is pending at the time of being considered.
25. Investigation Wing of Lokpal: (1) There shall be an investigation wing at Lokpal.
(2) Notwithstanding anything contained in section 17 of Prevention of Corruption Act, such officers
of Investigation wing, upto the level as decided by Lokpal, shall have, in relation to the
investigation and arrest of persons throughout India, in connection with investigation of complaints
under this Act, all the powers, duties, privileges and liabilities which members of Delhi Special
Police Establishment have in connection with the investigation of offences committed therein.
(3) That part of Delhi Special Police Establishment, in so far as it relates to investigation and
prosecution of offences alleged to have been committed under the Prevention of Corruption Act,
1988, shall stand transferred, alongwith its employees, assets and liabilities to Lokpal for all
purposes.
(4) That part of Delhi Special Police Establishment, which has been transferred under sub-section
(3), shall form part of Investigation Wing of Lokpal.
(5) The Central Government shall cease to have any control over the transferred part and its
personnel.
(6) The salaries, allowances and other terms and conditions of services of the personnel transferred
under sub-section (3) shall be the same as to which they were entitled to immediately before the
commencement of this Act.
(7) All cases which were being dealt by that part of Delhi Special Police Establishment, which has
been transferred under sub-section (3), shall stand transferred to Lokpal.
(8) After completion of investigation in any case, the investigation wing shall present the case to an
appropriate bench of Lokpal, which shall decide whether to grant permission for prosecution or not.
25A. Prosecution wing: There shall be a prosecution wing of Lokpal. After completion of its
investigations, the investigation wing shall forward the case to prosecution wing, which shall decide
whether to proceed with prosecution or not.
Provided that in certain category of cases, as prescribed by Lokpal, the permission to prosecute or
deny shall be taken by a bench of Lokpal.
Provided further that the prosecution wing shall decide whether to prosecute or not within a
fortnight of receipt of a case from investigation wing, else prosecution wing shall be deemed to
have decided to initiate prosecution.
26. Complaints against officers or employees of Lokpal: (1) Complaints against employees or officers of
Lokpal shall be dealt with separately and as per provisions of this section.
(2) Such complaint could relate to an allegation of an offence punishable under Prevention of Corruption
Act or a misconduct or a dishonest enquiry or investigation.
(3) As soon as such a complaint is received, the same shall be displayed on the website of Lokpal, alongwith
the contents of the complaint.
Provided that if the complainant so desires, his identity shall be protected.
(4) Investigations into each such complaint shall be completed within a month of its receipt.
(5) In addition to examining the allegations against the said official, the allegations shall especially be
examined against sections 107, 166, 167, 177, 182, 191, 192, 196, 199, 200, 201, 202, 204, 217, 218, 219,
463, 464, 468, 469, 470, 471, 474 of Indian Penal Code.
(6) If, during the course of investigations, it is felt that the charges are likely to be sustained, such officer
shall be divested of all his responsibilities and powers and shall be placed under suspension.
(7) If after completion of enquiry or investigations, it is decided to prosecute that person under Prevention
of Corruption Act, 1988 or he is held guilty of any misconduct or of conducting dishonest enquiry or
investigations, then that person shall not work with Lokpal anymore. Lokpal shall either dismiss that person
from the job, if that person is in the employment of Lokpal, or shall repatriate him, if he is on deputation,
with a recommendation for his removal.
Provided that no order under this clause shall be passed without giving reasonable opportunity of being
heard to the accused person.
Provided further that order under this clause shall be passed within 15 days of completion of investigations.
(8) A three member bench shall hear the cases of complaints against its staff and employees. However, for
officers of the level of Chief Vigilance Officer or above, the hearings shall be done by full bench of Lokpal.
(9) Lokpal shall take all steps to ensure that all enquiries and investigations on complaints against its own
staff and officials are conducted in most transparent and honest manner.
27. Protection- (1) No suit, prosecution, or other legal proceedings shall lie against the Chairperson
or members or against any officer, employee, agency or person referred to in Section 14(4) in
respect of anything which is in good faith done while acting or purporting to act in the discharge of
his official duties under this Act.
(2) No proceedings of the Lokpal shall be held to be bad for want of form and except on the ground
of jurisdiction, no proceedings or decision of the Lokpal shall be liable to be challenged, reviewed,
quashed or called in question in any court of ordinary Civil Jurisdiction.
Miscellaneous
28. Public Servants to submit property statements-
(1) Every public servant, other than those mentioned in Section 2(12)(a) to (c), shall within three
months after the commencement of this Act and thereafter before the 30th June of every year submit
to the head of that public authority, in the form prescribed by Lokpal, a statement of his assets and
liabilities and those of the members of his family. Public servants mentioned in sections 2(12)(a) to
(c) shall submit their returns in a format prescribed by the Lokpal, which shall include their sources
of incomes, to the Lokpal with the aforesaid time lines.
(2) The Head of each public authority shall ensure that all such statements are put on the website by
31st August of that year.
(3) If no such statement is received by the Head of that public authority from any such public
servant within the time specified in sub-section (1), the Head of that public authority shall direct the
concerned public servant to do so immediately. If within next one month, the public servant
concerned does not submit such statement, the Head shall stop the salary and allowances of that
public servant till he submits such statement.
Explanation- In this section “family of a public servant” means the spouse and such children
and parents of the public servant as are dependent on him.
(4) The Lokpal may initiate prosecution against such public servant under Section 176 IPC.
28A. Properties deemed to have been obtained through corrupt means: (1) If any property,
moveable or immoveable, is subsequently found to be owned by the public servant or any of his
family members, which had not been declared under this section by that public servant and which
was acquired before filing of last return under this section, the same shall be deemed to have been
obtained through corrupt means.
(2) If any property, moveable or immoveable, is subsequently found to be in possession of the
public servant or any of his family members, which had not been declared under this section by that
public servant, the same shall be deemed to be owned by that public servant and the same shall be
deemed to have been acquired through corrupt means by that public servant, the onus of proving
otherwise shall be on the public servant.
(3) The public servant shall be given an opportunity to explain, within 15 days,
(a) in the case of properties under sub-section (1) of this section, whether he had disclosed
that property in any of the earlier years.
(b) in the case of properties under sub-section (2) of this section, to explain why these
properties should not be deemed to be owned by the public servant.
(4) If public servant fails to provide satisfactory reply under sub-section (3) of this section with
respect to some properties, Lokpal shall immediately confiscate all such properties.
(5) Transfer of those properties for which notices are issued under sub-section (3) of this section,
shall be deemed to be null and void after the date of issue of such notices.
(6) Lokpal shall intimate such information to the Income Tax Department for appropriate action.
(7) Appeal against the orders of Lokpal shall lie in High Court of appropriate jurisdiction, which
shall decide the matter within three months of filing of the appeal.
Provided that no appeal shall be entertained after expiry of 30 days from the date of order of Lokpal
under sub-section (4).
(8) All properties confiscated under this section shall be auctioned to highest bidder. Half of the
proceeds from the same shall be deposited by the Lokpal in Consolidated Fund of India. The
balance amount could be used by Lokpal for its own administration.
Provided that if an appeal has been filed in any case, the auction shall not take place till the disposal
of appeal.
28B. (1) Within three months after the conclusion of any elections to the Parliament, the Lokpal
shall compare the property statements filed by the candidates with Election Commission of India
with their sources of income available with Income Tax Department. In such cases where assets are
found to be more than known sources of income, it shall initiate appropriate proceedings.
(2) For an allegation against a Member of Parliament that he has taken a bribe for any conduct in
Parliament, including voting in Parliament or raising question in Parliament or any other matter, a
complaint could be made to the Speaker of Lok Sabha or the Chairperson of Rajya Sabha,
depending upon the House to which that member belongs. Such complaints shall be dealt in the
following manner:
(a) The complaint shall be forwarded to the Ethics Committee within a month of its receipt.
(b) The Ethics Committee shall, within a month, decide whether to
29. Power to delegate and assign functions: (1) Lokpal shall be competent to delegate its powers
and assign functions to the officials working in Lokpal.
(2) All functions carried out and powers exercised by such officials shall be deemed to have been so
done by the Lokpal.
Provided that the following functions shall be performed by the benches and cannot be delegated:
(i) Granting permission to initiate prosecution in any case.
(ii) Order for dismissal of any government servant under CCS Conduct Rules.
(iii) Passing orders under section 10 on complaints against officials and staff of Lokpal.
(iv) Pass orders in cases of complaints, other than grievances, against officers of the level of Joint
Secretary and above.
30. Time limits: (1) Preliminary enquiry under sub-section (1) of section 9 of this Act should be
completed within a month of receipt of complaint.
Provided that the enquiry officer shall be liable for an explanation if the enquiry is not completed
within this time limit.
(2) Investigation into any allegation shall be completed within six months, and in any case, not
more than one year, from the date of receipt of complaint.
(3) Trial in any case filed by Lokpal should be completed within one year. Adjournments should be
granted in rarest circumstances.
30A. Transparency and application of Right to Information Act: (1) Lokpal shall make every
effort to put every information on its website.
(2) Once investigation or enquiry is complete in any case, all records related to that case shall be
available for public scrutiny. Lokpal shall preferably post all such records on its website.
Provided that the information, which is likely to disclose the identity of any person, who has
requested anonymity and such information which is likely to threaten internal and external security
of India shall not be disclosed.
31. Penalty for certain types of complaints- (1) Notwithstanding anything contained in this Act, if
someone makes any complaint under this Act, which lacks any basis or evidence and is held by
Lokpal to be meant only to harass certain authorities, Lokpal may impose such fines on that
complainant as it deems fit, but the total fine in any one case shall not exceed Rs one lakh.
Provided that no fine can be imposed without giving a reasonable opportunity of being heard.
Provided further that merely because a case could not be proved under this Act after investigation
shall not be held against a complainant for the purposes of this section.
(2) Such fines shall be recoverable as dues under Land Revenue Act.
(3) A complaint or allegation once made under this Act shall not be allowed to be withdrawn.
31A. Preventive measures: (1) Lokpal shall, at regular intervals, either study itself or cause to be
studied the functioning of all public authorities falling within its jurisdiction and in consultation
with respective public authority, issue such directions as it deems fit to prevent incidence of
corruption in future.
(2) Lokpal shall also be responsible for creating awareness about this Act and involving general
public in curbing corruption.
31B. Reward Scheme: (1) Lokpal shall encourage complainants from within and outside the
government to report and fight against corruption by publicly recognizing such persons.
(2) Lokpal shall also prepare an appropriate scheme to give financial award to such complainants.
Provided that the total value of such reward shall not exceed 10% of the value of property
confiscated or loss prevented.
32. Power to make Rules – (1) The Government may, by notification in the Official Gazette, make
rules for the purpose of carrying into effect the provisions of this Act.
Provided that such rules shall be made only in consultation and with the approval of Lokpal.
(2) In particular, and without prejudice to the generality of the foregoing provisions, such rules may
provide for .-
(i) the allowance and pensions payable to and other conditions of service of the Chairperson
and members of Lokpal;
(ii) the powers of a Civil Court which may be exercised by the Lokpal under clause (h) of subsection
(2) of section 11;
(2A) Lokpal shall also be competent to make its own rules for the proper functioning of Lokpal.
(i) the salary, allowances, recruitment and other conditions of service of the staff and
employees of the Lokpal;
(iii) procedure for registration of cases at Lokpal and initiation of prosecution
(iv)any other matter for which rules have to be made are necessary under this Act.
(3) Any rule made under this Act may be made with retrospective effect and when such a rule is
made the reasons for making the rule shall be specified in a Statement laid before both Houses of
the Parliament.
(4) Lokpal shall strictly adhere to the time limits mentioned at various places in this Act. In order to
achieve that, Lokpal shall lay down work norms for each level of functionaries and make an
assessment of the additional number of functionaries and budget required in accordance with
workload.
32A. It shall be the duty of the Lokpal to train its staff at regular intervals and take all other steps to
improve their skills and bring about an attitudinal change in dealing with the public.
33. Removal of difficulties- Notwithstanding anything contained in this Act, the President, in
consultation with Lokpal or on request of Lokpal may, by order, make such provision -
(i) for bringing the provisions of this Act into effective operation;
(ii) for continuing the enquiries and investigations pending before the Central Vigilance
Commission by the Lokpal.
34. Power to make regulations: Lokpal shall have power to make its own regulations for the
smooth functioning of the institution and to effectively implement various provisions of this Act.
35. This Act shall override the provisions of all other laws.

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